वाशिंगटन। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना की विशिष्ट मिशन इकाई, Delta Force के सदस्यों ने हिरासत में ले लिया गया है। वेनेजुएला में अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में डेल्टा फोर्स का नाम तेजी से उभरा है। चलिए आपको बताते हैं यह यूनिट कितनी खतरनाक है?
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डेल्टा फोर्स; जिसे आधिकारिक तौर पर प्रथम स्पेशल फोर्सेज ऑपरेशनल डिटैचमेंट-डेल्टा (1st SFOD-D) के रूप में जाना जाता है, इसकी प्रमुख विशेष मिशन इकाइयों में से एक है, जिसका मुख्य ध्यान आतंकवाद-विरोधी गतिविधियों पर रहता है। डेल्टा फोर्स में भर्ती पूरी अमेरिकी सेना से होती है, लेकिन ज्यादातर सैनिक आर्मी रेंजर्स और ग्रीन बेरेट्स से आते हैं।
चयन प्रक्रिया इतनी सख्त होती है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं। यहां सिर्फ शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और अकेले काम करने का आत्मविश्वास परखा जाता है। चुने गए जवानों की पहचान भी आधिकारिक दस्तावेजों में सीमित रखी जाती है।

डेल्टा फोर्स अपेक्षाकृत नई इकाई है, जिसकी स्थापना 1977 में इसके पहले कमांडर चार्ल्स बेकविथ ने की थी। इराक में सद्दाम हुसैन की तलाश, ISIS प्रमुख अबू बक्र अल-बगदादी के खिलाफ ऑपरेशन, सोमालिया और ग्रेनेडा में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयां- इन सब में इस यूनिट की भूमिका बताई जाती रही है। डेल्टा फोर्स को खतरनाक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह तेज, सटीक और बेहद गोपनीय तरीके से काम करती है।
इसके जवान पैराशूट जंपिंग, गोताखोरी, स्नाइपिंग, विस्फोटक निष्क्रिय करने और उन्नत चिकित्सा तक में प्रशिक्षित होते हैं। दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भी परिस्थिति में ऑपरेशन करने की क्षमता इसे अमेरिका की सबसे भरोसेमंद टियर-1 यूनिट बनाती है।
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