स्पोर्ट्स डेस्क। जब Cricket को तेज और प्राइम टाइम दर्शकों के लिए फिर से बनाने का फैसला किया गया तो सबसे बड़ा सवाल यह था की गेम को कितना छोटा किया जाना चाहिए जिससे दर्शकों के एंटरटेनमेंट में कोई कमी ना रहे। आइए जानते हैं की 20 ओवर का ही क्यों रखा गया क्रिकेट का सबसे छोटा फॉर्मेट?
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फॉर्मेट को 20 ओवर तक सीमित करने का सबसे बड़ा कारण समय था। एक 20 ओवर का मैच आमतौर पर लगभग 3 से 3.5 घंटे में खत्म हो जाता है। यही वजह है कि फैंस काम के बाद पूरी रात बर्बाद किए बिना पूरा मैच देख सकते थे। 25 या 30 ओवर का गेम समय को 4 घंटे या फिर उससे ज्यादा भी ले जा सकता था। इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड द्वारा किए गए मार्केट रिसर्च से यह पता लगा कि दर्शक ऐसे मैच चाहते थे जो तेज और लगातार रोमांचक हो। दर्शक धीमे चरणों वाले लंबे फॉर्मेट में दिलचस्पी खो रहे थे।

टी20 क्रिकेट बल्लेबाजों को पहली गेंद से ही हमला करने के लिए मजबूर करता है। सिर्फ 120 गेंद होने की वजह से लंबे समय तक संभल कर खेलने की कोई गुंजाइश नहीं बचती। 25 या 30 ओवर का फॉर्मेट शायद टीमों को बीच के ओवरों में धीमा होने के लिए प्रोत्साहित करता।
टी20 सिर्फ क्रिकेट के लॉजिक के बारे में नहीं था यह एक ब्रांडिंग एक्सरसाइज भी थी। इस फॉर्मेट की मदद से नए फैंस भी आकर्षित हुए जिन्हें टेस्ट मैच और यहां तक की वन डे इंटरनेशनल भी काफी लंबे लगते थे। 25 या 30 ओवर जैसे फॉर्मेट में वह सादगी और पंच नहीं था। लंबे फॉर्मेट से शेड्यूल में दिक्कत आती और कमर्शियली कम आकर्षक हो जाता।
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