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Thursday, January 1, 2026

जानें भारत के उन पर्वतों की कहानी; जो हैं हिमालय से भी ज्यादा पुराने

डेस्क। आज से करीब तीन अरब साल पहले अगर आप अंतरिक्ष से धरती को देखते तो मौजूदा भारत के उत्तरी किनारे पर एक लंबी, धुंधली-सी लेकिन सख्‍त चट्टानी रेखा दिखाई देती। न हिमालय, न बहती गंगा और न कोई रेगिस्तान बस एक अकेली पर्वतमाला- अरावली ही नजर आती। अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वतमाला (mountains) है। आईये भारत के अन्‍य पुराने पहाड़ों के बारे में जानते हैं।

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पूर्वी घाट का इतिहास लगभग 800 मिलियन यानी 80 करोड़ या 8000 लाख साल पुराना है। पूर्वी घाट भारत के दक्षिण-पूर्वी भाग में हिंद महासागर के तट पर मौजूद है। इसकी श्रृंखला ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों से होकर गुजरती है। पूर्वी घाट का सबसे ऊंचा पहाड़ ‘अरमा कोंडा’ है। इसके साथ ही यह 75,000 वर्ग किलोमीटर तक फैली हुई है।

विंध्य शब्द संस्कृत के शब्द ‘विन्ध्य’ से बना है, जिसका अर्थ है रास्ते में पड़ना। विंध्य पर्वत लगभग 650 मिलियन यानी 6500 लाख साल पुराना है। यह मध्य प्रदेश से वाराणसी (बनारस) की गंगा नदी घाटी से होकर गुजरती है। इसके साथ ही विंध्य पर्वत से गंगा-यमुना दक्षिणी सहायक नदिया निकलती हैं। इनमें चंबल, बेतवा, केन और टोन्स शामिल हैं। ये पहाड़िया आकार में छोटी हैं।

भारत में स्थित सतपुड़ा पहाड़ लगभग 600 मिलियन साल पुराना है। यह पूर्वी गुजरात से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ में जाकर खत्म होती है। यह पहाड़ियां लगभग 900 किलोमीटर तक फैली हुई है। सतपुड़ा पहाड़ की चोटियां पठार आकृति की तरह दिखाई देती है। महेंद्रगिरी पहाड़ का इतिहास भी काफी ज्यादा पुराना है। महेंद्रगिरी पहाड़ का वर्णन पौराणिक कथाओं जैसे रामायण और महाभारत में भी मिलता है। इस पहाड़ की ऊंचाई 1,501 मीटर है।

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