नई दिल्ली। प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की सगाई की खबरों के बीच इतिहास के पन्नों से एक पुराना सवाल फिर उभर आया है कि जिस परिवार ने आज रॉबर्ट वाड्रा के निजी फैसलों को खुले दिल से स्वीकार किया। उसी परिवार में कभी एक शादी ऐसी भी हुई थी, जिसमें इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के पिता मौजूद नहीं थे। क्या वजह सिर्फ धर्म थी या इसके पीछे और भी गहरे कारण छिपे थे?
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दरअसल जब बात गांधी परिवार की शादियों की होती है तो इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी का विवाह अपने आप चर्चा में आ जाता है। 26 मार्च 1942 को इलाहाबाद के आनंद भवन में हुई इस शादी में जवाहरलाल नेहरू की गैर मौजूदगी लंबे समय से जिज्ञासा का विषय रही है। आम धारणा यह रही है कि नेहरू अपनी बेटी के इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं थे।

इतिहासकारों के अनुसार नेहरू का विरोध केवल एक वजह तक सीमित नहीं था। सबसे अहम कारण धार्मिक अंतर बताया जाता है। इंदिरा गांधी एक हिंदू परिवार से थीं जबकि फिरोज गांधी पारसी समुदाय से आते थे। नेहरू चाहते थे कि इंदिरा की शादी सजातीय परिवार में हो। उस दौर में अंतरधार्मिक विवाह को सामाजिक रूप से सहज नहीं माना जाता था और यही सोच नेहरू के मन में भी थी।
धर्म के अलावा फिरोज गांधी की सामाजिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि भी नेहरू को पसंद नहीं थी। नेहरू को लगता था कि फिरोज की पृष्ठभूमि अपेक्षाकृत साधारण है और उनकी शिक्षा भी वैसी नहीं है जैसी वे अपनी बेटी के जीवनसाथी में देखना चाहते थे। वे चाहते थे कि इंदिरा का जीवन एक निश्चित सोच और स्तर के अनुरूप हो।
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