डेस्क। भारत में religion, जाति और समुदाय से जुड़े बयान हमेशा संवेदनशील रहे हैं। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हेट स्पीच पर पहले से भारतीय न्याय संहिता की धाराएं लागू हैं, लेकिन राज्यों ने अब अपने स्तर पर नियम और कड़े करने शुरू कर दिए हैं।
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उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और असम जैसे राज्यों में हेट स्पीच और सांप्रदायिक बयानबाजी पर पहले से सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है। कई मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या राज्य सुरक्षा कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई है। हालांकि इन राज्यों में अलग से हेट स्पीच पर नया कानून नहीं है, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के चलते सजा की आशंका ज्यादा रहती है। BNS के तहत यह साफ किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी माध्यम से जानबूझकर सामाजिक समूहों के बीच तनाव पैदा करता है या सार्वजनिक शांति भंग करने की कोशिश करता है, तो उस पर धारा 196 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

कर्नाटक विधानसभा ने जो विधेयक पारित किया है, उसमें हेट स्पीच की परिभाषा को बेहद व्यापक बनाया गया है। इसके तहत बोले गए शब्द, लिखित सामग्री, इशारे, दृश्य माध्यम और इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल संचार के जरिए सार्वजनिक रूप से फैलाया गया कोई भी नफरत भरा संदेश हेट स्पीच माना जाएगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि उनकी सरकार दूसरे धर्मों का अपमान करने वालों के खिलाफ कड़ा कानून लाने की तैयारी में है। इसके लिए मौजूदा कानूनों में बदलाव की योजना बनाई जा रही है ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान देने वालों को कड़ी सजा दी जा सके। आने वाले समय में एक बयान कानूनी संकट भी बन सकता है।
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