एंटरटेनमेंट डेस्क। फिल्म ‘Ikkis- द अनटोल्ड ट्रू स्टोरी ऑफ सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल’ एक जनवरी को सिनेमाघरों रिलीज हो रही है। इसमें अगस्त्य नंदा ने रियल लाइफ हीरो अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है। ये फिल्म दिवंगत धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म भी थी।
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अरुण खेत्रपाल का जन्म 14 अक्टूबर, 1950 में महाराष्ट्र के पुणे में एक पंजाबी हिंदू खतरी फैमिली में हुआ था। उनका परिवार विभाजन से पहले सरगोधा, जो आज पाकिस्तान में शामिल है वहां से ताल्लुक रखता था। इसके बाद में उनका पूरा परिवार भारत में ही आ गया। अरुण खेत्रपाल के साथ-साथ उनके परिवार ने भी देश की सेवा में अपना योगदान दिया था, जहां उनके पिता लेफ्टिनेंट एम.एल. खेत्रपाल भारतीय सेना में थे। वहीं उनके दादा प्रथम विश्व युद्ध लड़ चुके थे और उनके पर-दादा सिख खालसा आर्मी में शामिल थे।

अरुण खेत्रपाल को 13 जून 1971 में 17 पूना हार्स में शामिल किया गया। जिसके बाद 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी पूरी रेजिमेंट सेना के 47वीं इन्फैन्ट्री ब्रिगेड की कमान के अंतर्गत शामिल हुई और यहीं शुरू हुई वो लड़ाई जिसके जरिए अरुण खेत्रपाल ने इतिहास रच दिया। युद्ध के दौरान अरुण खेत्रपाल ने पाकिस्तान के कई टैंक्स को तबाह कर डाला लेकिन इस दौरान उनके साथियों के टैंक्स भी तबाह हो रहे थे। ये सब देखकर वो परेशान हुए पर उन्होंने हार नहीं मानी।
इसके बाद वो अकेले ही पड़ गए। अपनी बहादुरी दिखाते हुए उन्होंने पाकिस्तान के 10 टैंक्स तबाह कर दिए थे। इस दौरान उनपर कई गोलियां दागी गईं लेकिन उनके कदम नहीं डगमगाए। 16 दिसंबर 1971 को वो शहीद हो गए। इसके लिए उन्हें भारत सरकार की तरफ से परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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