डेस्क। Aravalli Hills दुनिया में सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में से एक हैं। हालांकि इनसे जुड़ा एक ताजा मामला सोशल मीडिया पर अभियान का रूप ले रहा है। दरअसल हाल ही में इन पर्वतों के पास खनन की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली गई। इस पर केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में एक जवाब दाखिल किया।
यह भी पढ़ें-पीएम मोदी के कितने हैं भाई-बहन, जानें परिवार में कौन-कौन क्या करता है?
इसी जवाब के बाद से देश भर में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिन्हें लेकर अरावली शृंखला चर्चा के केंद्र में आ गई। इतना ही नहीं अरावली के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘सेव अरावली कैंपेन’ यानी अरावली बचाओ अभियान तक चल पड़ा है। इस मामले में सियासत भी होने लगी है।
कहा जाता है कि पृथ्वी पर अरावली पर्वत शृंखला दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत शृंखला है। यह करीब दो अरब साल पुरानी है और भारत में सबसे पुरानी है। यह हिंद-गंगीय मैदानी इलाकों को रेगिस्तानी रेत से बचाने के लिए एक अहम पारिस्थितिकी बैरियर की तरह काम करता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर यह पर्वत शृंखला न होती तो भारत का उत्तरी क्षेत्र रेगिस्तान में तब्दील होना शुरू हो गया होता। हालांकि इस शृंखला के चलते ही थार रेगिस्तान अपने उत्तर की तरफ (हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश) तक नहीं फैल पाया।

अरावली पर्वत शृंखला का कुल विस्तार 800 किलोमीटर से अधिक है, जिसमें से लगभग 550 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान में आता है। सरकारी और तकनीकी अध्ययनों के अनुसार राजस्थान की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियां 100 मीटर की ऊंचाई की शर्त पूरी नहीं करतीं हैं। नई परिभाषा लागू होने पर राज्य की केवल 8 से 10 प्रतिशत पहाड़ियां ही कानूनी रूप से अरावली मानी जाएंगी, जबकि शेष विशाल क्षेत्र संरक्षण कानूनों से बाहर हो सकता है।
Tag: #nextindiatimes #AravalliHills #SupremeCourt




