नई दिल्ली। बीजेपी संगठन में एक अहम बदलाव करते हुए पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के नाम का एलान कर दिया है। बिहार सरकार में मंत्री रहे नितिन नबीन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह फैसला इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले जेपी नड्डा ने भी इसी पद से अपनी राष्ट्रीय नेतृत्व की यात्रा शुरू की थी और लगभग सात महीने बाद उन्हें पार्टी की कमान सौंप दी गई थी।
यह भी पढ़ें-अखिलेश या डिंपल यादव, जानें दोनों में कौन है ज्यादा पढ़ा-लिखा?
आइए जान लेते हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद राष्ट्रीय अध्यक्ष से कितना अलग होता है? राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी भी राजनीतिक दल का सर्वोच्च संगठनात्मक पद होता है। इनका मुख्य कार्य पार्टी की वैचारिक दिशा निर्धारित करना, सभी बड़े राजनीतिक और चुनावी फैसलों पर अंतिम मुहर लगाना होता है।
गठबंधन, चुनावी रणनीति और संगठन के भीतर की नियुक्तियों पर राष्ट्रीय अध्यक्ष ही अंतिम अधिकार रखते हैं। वे सार्वजनिक मंचों पर पार्टी का आधिकारिक चेहरा होते हैं और संगठन की संपूर्ण कमान उनके हाथ में होती है, जिससे वे पार्टी के वास्तविक बॉस माने जाते हैं।

राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का पद राष्ट्रीय अध्यक्ष की तुलना में अलग प्रकृति का होता है। यह पद मुख्य रूप से तब बनाया जाता है जब राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारियां बहुत अधिक हों। कार्यकारी अध्यक्ष का मुख्य काम रोजमर्रा के संगठनात्मक संचालन को देखना होता है। इसमें राज्यों के नेताओं से समन्वय स्थापित करना, अभियानों और कार्यक्रमों की निगरानी करना, तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा दिए गए निर्देशों को जमीन पर लागू कराना शामिल है।
सबसे अहम फर्क यह है कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आमतौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष (National President) के अधीन काम करता है। उसके फैसले अंतिम नहीं होते, बल्कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की सहमति या दिशा-निर्देश पर आधारित होते हैं।
Tag: #nextindiatimes #NationalPresident #BJP




