13 C
Lucknow
Friday, January 2, 2026

किसने शुरू किया था पहला ‘वंदे मातरम’ नाम का अखबार, कौन थे इसके संपादक?

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में आज Vande Mataram पर जोरदार बहस चल रही है। गृह मंत्री ने राज्यसभा में इस चर्चा की शुरुआत की है। उन्होंने विपक्ष के कई आरोपों का जवाब दिया है और साथ ही यह बताया है कि संसद में वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों की जा रही है। कल प्रधानमंत्री मोदी ने उन अखबारों का भी जिक्र किया था जो स्वतंत्रता की लड़ाई में शुरू किए गए थे और उनका नाम वंदे मातरम था।

यह भी पढ़ें-जन गण मन से पहले लिखा गया था ‘वंदे मातरम’, फिर क्यों नहीं बन पाया राष्ट्रगान?

अगस्त 1906 में राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्रपाल ने कोलकाता से ‘बंदे मातरम’ नाम का एक अंग्रेजी साप्ताहिक अखबार शुरू किया। उनका सीधा सा मकसद था राष्ट्रीय गौरव जगाना, स्वदेशी को बढ़ावा देना और साथ ही भारतीयों की राजनीतिक आकांक्षाओं को समाज के अंग्रेजी बोलने वाले वर्ग तक पहुंचाना। बिपिन चंद्र पाल का प्रकाशन जल्द ही एक बौद्धिक हथियार बन गया।

अखबार के लांच होने के तुरंत बाद श्री अरबिंदो घोष ने बंदे मातरम के संपादक का पद संभाल लिया। उन्होंने इस अखबार को साप्ताहिक से दैनिक बनाया और इसे कांग्रेस के अंदर चरमपंथी गुट की सबसे प्रभावशाली आवाज बना दिया। ब्रिटिश सरकार ने अखबार को इतना खतरनाक माना कि इसे सीधे तौर पर 1910 के प्रेस अधिनियम जैसे कड़े कानून के पीछे एक वजह बताया गया। इस अधिनियम को क्रांतिकारी विचारों को दबाने के लिए बनाया गया था।

मैडम भीकाजी कामा ने 1909 में पेरिस से वंदे मातरम नाम का एक राष्ट्रवादी अखबार का प्रकाशन शुरू किया था। इस अखबार का उद्देश्य भारत में राष्ट्रवाद और ब्रिटिश विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देना था। इसके लिए मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस में पेरिस इंडियन सोसाइटी की स्थापना की और उसी के जरिए इस अखबार का प्रकाशन शुरू किया।

Tag: #nextindiatimes #VandeMataram #Parliament

RELATED ARTICLE

close button