नई दिल्ली। नेशनल कमिशन फॉर बैकवर्ड क्लासेस के सेंट्रल OBC लिस्ट से 35 कम्युनिटी को हटाने की सिफारिश के बाद पश्चिम बंगाल में विवाद खड़ा हो चुका है। इसमें से ज्यादातर मुस्लिम ग्रुप हैं जिन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ओबीसी लिस्ट में शामिल किया गया था। खैर आइए जानते हैं कि भारत में ओबीसी लिस्ट कैसे तैयार की जाती है?
यह भी पढ़ें-जनगणना कराने में कितना आता है खर्च?
यह तय करने के लिए कि कोई समुदाय पिछड़ा है या फिर नहीं समाज में उनकी जगह तय करने वाले कई पहलुओं को समझा जाता है। इसमें यह भी शामिल है कि क्या कोई समुदाय ऐतिहासिक रूप से जाति के क्रम में निचले स्थान पर रहा है या फिर उसे अभी भी बाहर रखा जाता है या उसे भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
एजुकेशनल पिछड़ापन एक और कारण है जहां लिटरेसी रेट, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या और हायर एजुकेशन में रिप्रेजेंटेशन की जांच की जाती है। लक्ष्य उन समुदाय की पहचान करना है जो सिर्फ उस समय की आर्थिक मुश्किलों का सामना नहीं कर रहे बल्कि एक स्ट्रक्चरल नुकसान का सामना कर रहे हैं।

ओबीसी को शामिल करने या फिर बाहर करने के पीछे एक टेक्निकल प्रोसेस होता है। किसी भी समुदाय या फिर राज्य सरकार को पहले जरूरी डेटा के साथ एक ऑफिशियल रिक्वेस्ट जमा करनी होती है। इसके बाद एनसीबीसी एक डिटेल जांच करता है। सर्वे टीम फील्ड स्टडी कर सकती है या फिर ऐतिहासिक और स्टैटिस्टिक्ल सबूत इकट्ठा कर सकती है। जैसे ही जांच पूरी हो जाती है कमीशन अपनी रिकमेंडेशन केंद्र सरकार को भेजता है। सरकार के इस रिकमेंडेशन को मानने और पार्लियामेंट में नोटिफिकेशन पब्लिश करने के बाद ही कोई कम्युनिटी ऑफीशियली सेंट्रल ओबीसी लिस्ट में शामिल होती है या फिर बाहर होती है।
Tag: #nextindiatimes #OBC #WestBengal




