डेस्क। SIR अभियान इस समय देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेजी से चल रहा है लेकिन इसके बीच बूथ लेवल अफसरों की लगातार हो रही मौतों ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। BLO; वह व्यक्ति होता है जो हर घर का दरवाजा खटखटाता है, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ता है, हटाता है, गलतियां सुधारता है और चुनाव के दिन तक अनगिनत दबाव झेलता है।
यह भी पढ़ें-गृहमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी की सैलरी में हुआ कितना इजाफा, जानें यहां
BLO की जिम्मेदारियां चुनाव आयोग द्वारा तय की जाती हैं और इन्हें आमतौर पर स्थानीय शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत कर्मचारी या फिर सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों में से चुना जाता है। इनका काम सिर्फ नाम जोड़ना या हटाना ही नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि इलाके का हर योग्य नागरिक वोटर लिस्ट में दर्ज हो और कोई भी फर्जी नाम या दोहरी प्रविष्टि मतदाता सूची को गड़बड़ न कर दे।

इनका सबसे कठिन चरण शुरू होता है जब नया मतदाता पहचान पत्र बनाना हो। इसके लिए उन्हें घर-घर जाकर सत्यापन करना पड़ता है। पता बदलने, परिवार में नई एंट्री होने, किसी की मृत्यु होने या किसी भी नागरिक के उम्र पूरी करने पर BLO को फॉर्म-6, फॉर्म-7, फॉर्म-8 जैसी प्रविष्टियों को संभालना पड़ता है। ये काम आसान नहीं होता क्योंकि हर दस्तावेज की जांच, मोबाइल एप्लिकेशन में उसका अपलोड और फिर बूथ स्तर पर उसकी पुष्टि, यह सारी जिम्मेदारी बीएलओ की होती है।
BLO को अब सालाना लगभग 12,000 रुपये का मानदेय मिलता है। इसके अलावा जब भी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (SIR) या वार्षिक संशोधन होता है तो BLO को अलग से प्रोत्साहन राशि भी मिलती है जो आमतौर पर 1,000 रुपये से 2,000 रुपये के बीच होती है।
Tag: #nextindiatimes #BLO #SIR




