डेस्क। आज पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जा रहा है। जगह-जगह खेल आयोजन हो रहे हैं लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि दिन हर साल 29 अगस्त को ही खेल दिवस क्यों मनाया जाता है? दरअसल इस दिन भारत के महान हॉकी (hockey) खिलाड़ी और ‘हॉकी के जादूगर’ कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद का जन्म हुआ था।
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ध्यानचंद ने अपने करियर में 1000 से ज्यादा गोल किए थे और दुनिया भर में भारत की hockey का परचम लहराया। ध्यानचंद को ‘चंद’ की संज्ञा देने के पीछे एक कहानी है। वह रात को मैदान में हॉकी की प्रैक्टिस किया करते थे। उस वक्त स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था न होने के चलते वह अंधेरे में ही प्रैक्टिस किया करते थे। बावजूद इसके वह गेंद को आसानी से हिट कर देते थे। उनकी इसी महारथ पर उनके दोस्तों ने उन्हें ‘चंद’ कहना शुरू किया, इसके बाद यह उनके नाम के साथ भी जुड़ गया।

बात 1936 में बर्लिन ओलंपिक की है। भारत पहले मैच के बाद शानदार फॉर्म में था। लोग उस वक्त अन्य खेलों जैसे क्रिकेट और फुटबॉल में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे थे। उस वक्त भारत के हर मैच से बर्लिन में पोस्टर लगे थे, “हॉकी स्टेडियम जाइए और भारतीय जादूगर ध्यानचंद की जादूगरी देखिए।” हिटलर भी उनके खेल का दीवाना हो गया था।
ध्यानचंद की hockey स्टिक को लेकर उस दौर में चर्चाएं इतनी थीं कि नीदरलैंड में एक टूर्नामेंट के दौरान अधिकारियों को शक हुआ कि उनकी हॉकी स्टिक में जरूर कोई चुंबक लगा होगा, इसीलिए इतने गोल हो जाते हैं। जांच करने के लिए उनकी स्टिक को वहीं तोड़कर देखा गया, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। इसके बाद किस्सा इतिहास में अमर हो गया।
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