योगेंद्र यादव ने भाजपा पर कसा तंज, कहा…

खरगोन में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने आए सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने कहा कि बीजेपी राहुल गांधी के मंदिर जाने से डरने लगी है। उन्होंने कहा कि कन्याकुमारी से भारत जोड़ों का एक विचार चला था जो अब नदी बन गया है। बीजेपी को समझ नहीं आ रहा किस नदी को आगे बढ़ने से कैसे रोके। योगेंद्र यादव ने कहा कि राहुल गांधी तो वही कर रहे हैं जो एक सामान्य व्यक्ति करता है। वह मंदिर भी जाता है, गुरुद्वारे भी जाता है और चर्च भी।  दिक्कत उनको है जिनके चश्मे में सिर्फ एक ही चीज दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा ने देश का मिजाज बनना बदलना शुरू कर दिया है।  जो चुप्पी और डर का माहौल था वह टूट रहा है और जब जनता का डर टूटता है तो कुर्सी वालों को डर लगने लगता है।

भारत जोड़ो यात्रा में शामिल होने आए सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने राहुल गांधी से मुलाकात की और उनके साथ यात्रा में शामिल हुए । राहुल गांधी ने यात्रा के दौरान मध्यप्रदेश के ओमकारेश्वर में स्थित ज्योतिर्लिंग में जाकर भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए। साथ ही मा नर्मदा को चुनरी चढ़ाकर उनकी आरती भी की । इस दौरान उनके साथ उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा उनके जीजा रॉबर्ट वाड्रा भी मौजूद रहे। 

योगेंद्र यादव ने मीडिया से बात की। योगेंद्र यादव से पूछा गया कि बीजेपी के डर से क्या कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर मुड़ गई है । तो उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि इस सब से बीजेपी डर गई है। बीजेपी में बौखलाहट है। उसे समझ नहीं आ रहा किस बहती नदी को कैसे रोके। उन्होंने  ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत कन्याकुमारी से एक विचार था जो बाद में धारा बनी और अब एक नदी का रूप ले चुकी है। और इस नदी के बहाव को बीजेपी कैसे रोके उन्हें समझ नहीं आ रहा इसलिए रोज नए-नए उटपटांग काम करती है। राहुल गांधी तो सामान्य काम कर रहे हैं। नांदेड़ में गुरुद्वारा था तो गुरुद्वारे गए। यह प्रसिद्ध मंदिर है तो मंदिर गए। कल को किसी चर्च में जाना होगा तो वहां भी जाएंगे। एक सामान्य भारतीय नागरिक यही करता है। दिक्कत उनको है जिनके चश्मे में एक ही चीज नजर आती है। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा ने इस देश का मिजाज बदलना शुरू कर दिया है। जनता का मुंड बदलना शुरू हो रहा है । आज से ढाई महीने पहले जो चुप्पी, अकेलेपन और डर का माहौल था वो टूट रहा है । और जब जनता का डर टूटता है, तो कुर्सी वालों को डर लगने लगता है। 

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