‘श्रीरामचरित मानस और प्रबंधन नीति’ के लेखक राजीव आचार्य और सुरभि को मिला ‘तुलसीदास साहित्य सम्मान’

लेखक राजीव आचार्य ने अपनी पुस्तक के विषय में बताया गया कि चौपाईयों एवं दोहों के माध्यम से मैंने प्रबंधन के सूत्रों का वर्णन किया है।

लखनऊ के मोती महल लॉन में राष्ट्रीय पुस्तक मेला चल रहा है। इस अवसर पर द शेड फाउंडेशन लखनऊ, एसआरएनओ लखनऊ वर्ल्ड विजन इंडिया तथा सुलभ इंटरनेशनल सामाजिक संस्थाओं द्वारा श्री रामचरितमानस और प्रबंधन नीति पर एक परिचर्चा ‘साहित्य समागम’ का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण रहे। समारोह की अध्यक्षता उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ के सेवानिवृत्त न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह ने की।  

श्रीरामचरितमानस और प्रबंधन नीति के लिये मोतीमहल लॉन में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने श्री राजीव आचार्य और उनकी पत्नी श्रीमति सुरभि को तुलसीदास साहित्य सम्मान से सम्मानित किया।

बताते चलें कि राजीव आचार्य तथा सुरभि अपने सामाजिक दायित्वों को निर्वाह करने के साथ-साथ किताबों से प्रेम करते हैं। राजीव आचार्य उपभोक्ता सहकारी संघ लि. में एम.डी. के पद पर आसिन हैं और उनकी पत्नी गृहणी हैं। दोनों की सकारात्मक सोच का नतीजा है कि रामचरित मानस की चौपाईयों एवं दोहों के माध्यम से उस काल से लेकर वर्तमान दौर में चल रहे प्रबंधन का बड़ी ही खूबसूरती से वर्णन किया है। प्रबंधन सिर्फ राजनीति की नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्तों मसलन पति-पत्नी, भाई, पुत्र, माता-पिता, शासक वगैरह सभी के आदर्श चरित्र का वर्णन किया गया है। इस दौरान मुख्य अतिथि हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि भगवान श्रीराम का आदर्श चरित्र अपनाकर हम एक आदर्श समाज की स्थापना कर सक ते हैं। भगवान श्रीराम ने न केवल पुत्र धर्म का पालन किया बल्कि पतिधर्म,भ्राता धर्म के साथ-साथ एक आदर्श शासक के रुप में मर्यादा का पालन किया है। उन्होंने अधर्मी बाली का वध किया वहीं रावण के साथ-साथ समस्त असुरों का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय दिलायी।इसी क्रम में राज्य मंत्री,स्वतंत्र प्रभार स्वाति सिंह ने कहा कि रामचरित मानस हमें जीवन के सभी क्षेत्र में सफलता के सूत्रों कर वर्णन करती है।

लेखक राजीव आचार्य ने अपनी पुस्तक के विषय में बताया गया कि चौपाईयों एवं दोहों के माध्यम से मैंने प्रबंधन के सूत्रों का वर्णन किया है। प्रबंधन के मुख्य सूत्र मसलन,लीडरशिप,डेवलेपमेंट,लक्ष्य निर्धारण,नियोजन,संसाधनों का समुचित उपयोग,संवाद कौशल आदि की व्याख्या रामचरितमानस के दोहों एवं चौपाईयों के माध्यम से की गयी है। इस दौरान पाठकों द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब भी राजीव आचार्य ने दिया। इसी क्रम में न्यायाधीश उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ देवी प्रसाद सिंह द्वारा राम राज्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।

समारोह के मुख्य अतिथि श्री हृदय नारायण दीक्षित ने इस अवसर पर बताया कि भगवान श्रीराम का चरित्र समाज के लिए अनुकरणीय है। भगवान श्रीराम ने न केवल पुत्र धर्म का पालन किया बल्कि पतिधर्म, भ्राता धर्म के साथ-साथ एक आदर्श शासक के रूप में मर्यादा का पालन किया। भगवान श्रीराम ने न केवल अधर्मी बली का वध किया साथ ही रावण के साथ-साथ समस्त असुरों का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय दिलाई।

समारोह के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खंडपीठ न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह द्वारा रामराज्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने पुस्तक में उठाए गए विषयों पर भी प्रकाश डालते हुए पुस्तक की प्रशंसा की और समाज के प्रत्येक व्यक्ति को पुस्तक पढ़ने के लिए जाग्रत किया।

इस अवसर पर विभिन्न साहित्यकार डॉ. महेंद्र भीष्म, डॉ विनीता मिश्रा, डॉ निर्मला मिश्रा एवं विभिन्न साहित्यकारों द्वारा पुस्तक पर परिचर्चा करते हुए अपने विचार रखे। इस अवसर पर श्री किशोर चतुर्वेदी एवं श्रीमती सुरभि चतुर्वेदी द्वारा श्री रामचरितमानस के प्रसंगों को भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में भगवान श्री राम और सीता माता की झांकी भी प्रस्तुत की गई जिसे देखकर दर्शक आनंदित हो उठे।

देश और विदेश की ताज़ातरीन खबरों को देखने के लिए हमारे चैनल को like और Subscribe कीजिए
Youtube- https://www.youtube.com/NEXTINDIATIME
Facebook: https://www.facebook.com/Nextindiatimes
Twitter- https://twitter.com/NEXTINDIATIMES
Instagram- https://instagram.com/nextindiatimes
हमारी वेबसाइट है- https://nextindiatimes.com
Google play store पर हमारा न्यूज एप्लीकेशन भी मौजूद है

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

eleven − two =

Back to top button