//

No icon

लिपिस्टक अंडर लॉकडाउन

सुर्ख होंठों पर छाया कोरोना का पर्दा, महामारी में फीकी पड़ी लिपिस्टक की रंगत, कारोबार में आई भारी गिरावट

महिलाओं की खूबसूरती की बात चले हो और उसमें होंठों का जिक्र न आए तो बात अधूरी रह जाती है। कई ऐसी बॉलीवुड फिल्में हैं, जिसमें गीतकारों ने होंठों पर बेहतरीन गाने लिखे हैं। होठों पे बस तेरा नाम हो...होठों से छू लो तुम...होठों में ऐसी बात मैं दबा के चली आई...जैसे गाने, स्त्रियों के होठों की खूबसूरती को बयान करते हैं। लेकिन कोरोना काल में यही होंठ मास्क के पीछे छिप गए हैं जिससे लिपस्टिक बनाने वाली कंपनियां और कारोबारी भी प्रभावित हुए हैं।

विश्वभर में लगातार फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण और संक्रमण की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बाद सभी महिलाएं सुरक्षा के मद्देनजर अपने-अपने घरों में हैं। बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है। शादियां, पार्टियां और सामाजिक जलसे बंद हैं। महिलाओं को घर से निकलते समय फेस पर मास्क लगाने अनिवार्य है।  सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों के कारण मेलजोल की गुंजाइश भी नहीं बची है। इस बीच महिलाओं के मेकअप के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव हुआ है। जिससे एक तथ्य सामने आया है कि बाजारों में बिकने वाली लिपिस्टक की बिक्री में भारी कमी देखने को मिल रही है।

लिपस्टिक महिलाओं की खूबसूरती में और निखार लाती है, लेकिन कोरोना काल में यही होंठ और सुंदर चेहरा मास्क के पीछे छिप जा रहा है। जिसका परिणाम हुआ है कि लिपस्टिक सहित फेयरनेस क्रीम व चेहरे पर इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर उत्पादों की मांग में 60 से 75 फीसद की भारी कमी देखने को मिली है।

लखनऊ का भूतनाथ मार्केट महिलाओं के कपड़ों से सजावट सामग्री के पटा रहता था। लेकिन लॉकडाउन ने बाजार की रंगत छीन ली है। दुकानदारों का कहना है कि बाजार सुना पड़ा है और खरीददारों की संख्या में भारी कमी आई है। एक दुकानदार से जब हमनें बात की तो उसने बताया कि “लॉकडाउन  और कोरोना के डर की वजह से ज्यादातर अधिकतर महिलाएं घरों के भीतर कैद होकर रह गई हैं और जो कामकाजी महिलाएं अब लॉकडाउन में छूट के बाद घरों से बाहर निकल भी रही है, वो भी मॉस्क पहनकर निकल रही हैं जिससे लिपस्टिक का कारोबार बुरी तरह प्रभावित होकर रह गया है”

इंडस्‍ट्री के सूत्रों के मुताबित भारत में हमेशा से ही आई मेकअप मार्केट रहा है। कुल ब्‍यूटी बिजनेस में आई मेकअप का मार्केट शेयर 36 फीसदी, जबकि लिपस्टिक का 32 फीसदी है.

कंज्यूमर के बिहेवियर में बदलाव को ध्यान में रखते हुए कॉस्मेटिक प्रोडक्‍ट बनाने वाली कंपनियां ने हालांकि लिपिस्टक के दाम भी कम किए हैं और ब्रांडेड लिपस्टिक को एक पर एक फ्री जैसे ऑफर या भारी डिस्काउंट के साथ होम डिलीवरी पर भी जोर दिया जा रहा है। कंपनियों को लगता है कि लिपस्टिक में गिरावट का दौर अस्‍थायी है और स्थितियों के सामान्‍य होने पर जल्‍द यह खत्‍म हो जाएगा। लेकिन जो हाताल हैं उससे लग नहीं रहा है कि आगामी दिनों में लिपिस्टक की खरीददारी में कोई बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।    

 


TOP