बदरीनाथ में नहीं होती वोटिंग, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा सीट (Badrinath Assembly Seat) राज्य गठन से पहले बदरी-केदार नाम से जानी जाती थी। 2002 में दशोली, जोशीमठ और गोपेश्वर नगर क्षेत्र को मिलाकर बनी इस सीट में परिसीमन के बाद 2012 में नंदप्रयाग सीट का पोखरी क्षेत्र भी जोड़ दिया गया। सीट का नाम भले ही बदरीनाथ हो, लेकिन बदरीनाथ के मतदाताओं के प्रवास में ही मतदान करने के चलते यहां कभी वोट नहीं पड़ा।

इसलिए है खास

चमोली जिले की बदरीनाथ विधानसभा सीट में जिला मुख्यालय गोपेश्वर के भी शामिल होने से इसे जिले की प्रमुख सीट माना जाता है। साथ ही बदरीनाथ नाम होने के कारण स्वाभाविक रूप से इसके वीआइपी होने का भाव भी आ जाता है। गंगोत्री की तरह इस सीट को लेकर भी मिथक है कि यहां से जिस दल का भी प्रत्याशी विधानसभा पहुंचता है, प्रदेश में उसी दल की सरकार बनती है।

रुझान

2003 और 2012 में कांग्रेस, 2007 व 2017 में भाजपा। वोटर ने हमेशा राष्ट्रीय दलों पर ही भरोसा किया। यहां 102128 वोटर हैं। इनमें 52626 पुरुष, 49499 महिला व तीन थर्ड जेंडर शामिल हैं।

राजनीतिक इतिहास

बदरीनाथ सीट पर भाजपा और कांग्रेस, दोनों का दबदबा रहा। 2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डा.अनुसुया प्रसाद मैखुरी ने भाजपा प्रत्याशी तत्कालीन काबीना मंत्री केदार सिंह फोनिया को हराया था। 2007 में भाजपा प्रत्याशी फोनिया ने कांग्रेस प्रत्याशी मैखुरी को हराकर सीट पर कब्जा किया। 2012 में कांग्रेस के राजेंद्र भंडारी व 2017 में भाजपा के महेंद्र भट्ट यहां से चुनाव जीते।

सामाजिक समीकरण

बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र में भोटिया जनजाति के मतदाता बड़ी संख्या में रहते हैं। वर्ष 2016 में जोशीमठ ब्लाक को ओबीसी घोषित किए जाने के बाद इस सीट पर ओबीसी मतदाताओं की संख्या भी बढ़ी है। इस सीट में नगर क्षेत्र जोशीमठ, चमोली, गोपेश्वर व पोखरी के साथ पोखरी, दशोली व जोशीमठ ब्लाक भी शामिल हैं। शहरी क्षेत्र भी शामिल होने के कारण इस सीट पर मुस्लिम मतदाता भी हैं।

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