यूपी सरकार द्वारा मुफ्त राशन वितरण योजना बंद करना गरीब के साथ छलावा- प्रमोद तिवारी

कांग्रेस सांसद एवं सीडब्ल्यूसी मेंबर प्रमोद तिवारी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में गरीबों एवं आम आदमी के लिए शुरू की गयी मुफ्त राशन वितरण योजना को बंद किये जाने के सरकारी फैसले को जनता के साथ बड़ा धोखा करार दिया है।तिवारी ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए लोगों को मुफ्त राशन देने की शुरूआत कर इसे अब इसलिए बंद कर दिया क्योकि भाजपा को मालूम है कि यूपी में अब विधानसभा चुनाव अगले साढे चार साल बाद ही होंगे।

प्रतापगढ़ – (आरएनएस)

उन्होने कहा कि लोक सभा चुनाव को भी अभी दूर देख भाजपा ने मध्यम तथा गरीब तबके के नेवाले पर भी हमला बोलकर प्रदेशवासियों के साथ अक्षम्य विश्वासघात किया है। गुरूवार को लालगंज नगर स्थित कैम्प कार्यालय पर पत्रकार वार्ता के दौरान कांग्रेस राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रदेश की गरीब तबके की जनता को सूबे की सरकार द्वारा मिलने वाले गेहूं को दो रूपये प्रतिकिलो और चावल को तीन रूपये प्रतिकिलो खरीदने के लिए इसलिए विवश कर दिया कि उसे मालूम है कि चुनावी लाभ के लिए अभी भाजपा को प्रदेश में मुफ्त राशन वितरण करने की कोई आवश्यकता नही है। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा चुनाव के समय बार बार कह रही थी कि प्रदेश की जनता को अनवरत मुफ्त राशन योजना से लाभान्वित किया जाता रहेगा। हालांकि सांसद प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल बार बार इस योजना पर सरकार की नियति को खोटा बताते हुए इसे चुनावी लालीपाप ठहरा रहे थे। राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने प्रदेश सरकार के एक और फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि योगी सरकार ने गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए सरकारी पारिवारिक आर्थिक अनुदान पर भी रोक लगाकर गरीब की आशाओं को धूमिल कर दिया है। उन्होने कहा कि सूबे की बीजेपी सरकार ने तत्कालीन कांग्रेस सरकारों द्वारा शुरू की गयी प्रदेश की अनुसूचित जाति, जनजाति एवं गरीब पिछड़े वर्ग तथा मध्यम वर्गीय सामान्य परिवारों की पुत्रियों के लिए शादी अनुदान की पारदर्शी कल्याणकारी योजना की शुरूआत की थी। उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार ने शादी अनुदान योजना के तहत सीधे लाभार्थी के खाते मे अनुदान की धनराशि भेजे जाने की योजना को समाप्त कर बेटियों की प्रतिष्ठा एवं खुशी पर भी ग्रहण बन गयी। उन्होने सरकार के सामूहिक विवाह योजना की आड़ मे इस योजना पर रोक लगाने को अव्यवहारिक ठहराते हुए कहा कि सामूहिक विवाह योजना की सरकारी नीति में सीधे गरीब की पुत्री के खाते में धनराशि मिलने की जगह यह धनराशि सरकारी तंत्र को हस्तांतरण हुआ करती है। ऐसे में बकौल सांसद प्रमोद तिवारी सामूहिक विवाह योजना अधिकारियों की लूट खसोट का एक और माध्यम बन गया है। 

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