इस पौष पुत्रदा एकादशी व्रत भी रखा जाएगा। साल के पहले सोमवार पर जरूर करें इन मंत्रों का जाप..

नव वर्ष 2023 का स्वागत बड़े ही हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा है। यह साल सभी प्रकार से मंगलमय रहे इसकी प्रार्थना सभी लोग रहे हैं। बता दें कि कल यानि 2 दिसंबर को इस वर्ष का पहला सोमवार है। शास्त्रों के अनुसार सोमवार के स्वामी भगवान शिव स्वयं हैं। मान्यता है कि सोमवार के दिन भगवान शिव की उपासना करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके साथ साल के पहले सोमवार पर भगवान विष्णु की पूजा का भी योग बन रहा है। कल यानि पौष मास के एकादशी तिथि के दिन पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की पूजा का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इसलिए सोमवार के दिन नितपूजा के साथ शिव दरिद्रता नाशक स्तोत्र एवं भगवान विष्णु स्तुति का पाठ अवश्य करें।

शिव दरिद्रता नाशक स्तोत्र

जय देव जगन्नाथ, जय शंकर शाश्वत। जय सर्व-सुराध्यक्ष, जय सर्व-सुरार्चित ।।

जय सर्व-गुणातीत, जय सर्व-वर-प्रद । जय नित्य-निराधार, जय विश्वम्भराव्यय ।।

जय कोट्यर्क-संकाश, जयानन्त-गुणाश्रय । जय रुद्र-विरुपाक्ष, जय चिन्त्य-निरञ्जन ।।

जय नाथ कृपा-सिन्धो, जय भक्तार्त्ति-भञ्जन । जय दुस्तर-संसार-सागरोत्तारण-प्रभो ।।

प्रसीद मे महा-भाग, संसारार्त्तस्य खिद्यतः। सर्व-पाप-भयं हृत्वा, रक्ष मां परमेश्वर ।।

महा-दारिद्रय-मग्नस्य, महा-पाप-हृतस्य च। महा-शोक-विनष्टस्य, महा-रोगातुरस्य च ।।

ऋणभार-परीत्तस्य, दह्यमानस्य कर्मभिः। ग्रहैः प्रपीड्यमानस्य, प्रसीद मम शंकर ।।

फल-श्रुति

दारिद्रयः प्रार्थयेदेवं, पूजान्ते गिरिजा-पतिम्। अर्थाढ्यो वापि राजा वा, प्रार्थयेद् देवमीश्वरम्।।

दीर्घमायुः सदाऽऽरोग्यं, कोष-वृद्धिर्बलोन्नतिः। ममास्तु नित्यमानन्दः, प्रसादात् तव शंकर ।।

शत्रवः संक्षयं यान्तु, प्रसीदन्तु मम गुहाः। नश्यन्तु दस्यवः राष्ट्रे, जनाः सन्तुं निरापदाः।।

दुर्भिक्षमरि-सन्तापाः, शमं यान्तु मही-तले। सर्व-शस्य समृद्धिनां, भूयात् सुख-मया दिशः।।

भगवान विष्णु स्तुति

शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णशुभांगम्।

लक्ष्मीकांतम् कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं

वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलौकेक नाथम्।।

यं ब्रह्मा वरुणैन्द्रु रुद्रमरुत: स्तुन्वानि दिव्यै स्तवैवेदे:।

सांग पदक्रमोपनिषदै गार्यन्ति यं सामगा :।

ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यति यं योगिनो

यस्यातं न विदु: सुरासुरगणा दैवाय तस्मै नम:।।

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