सपा के संरक्षक मुलायम सिंह के फैसले जिसने लिख डाली किस्मत

मुलायम सिंह यादव भले अब इस दुनिया में नहीं रहे पर उनकी कई बातें यादगार रहेगी। उनमें से एक उनके फैसले लेने की स्टाइल है। जिसने लोगो की किस्मत बदल डाला। सुल्तानपुर से 2007 में पहली बार विधायक बनने वाले अनूप संडा एक हैं। जीतकर जब वो लखनऊ पहुंचे उस समय नेता जी ने वरिष्ठ नेताओं के बीच में कहा “देखो जीतकर आ गया“ ऐसा ही एक फैसला मुलायम सिंह ने साल 1993 में सुल्तानपुर सीट पर लिया था। जब उन्होंने अधिवक्ता बरकत अली को टिकट दे दिया और वो विधायक बनकर सदन में पहुंच गए।

सुल्तानपुर (आरएनएस)

अनूप संडा वर्तमान में समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता हैं। 2007 और 2012 में लगातार दो बार जीतकर वो विधानसभा में पहुंचे। हालांकि 2017 और 2022 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस बार उन्हें मामूली वोटों से शिकस्त मिली। अनूप संडा ने 2007 के चुनावी समर में सपा में इंट्री की थी। सपा में टिकट के दावेदारो की कमी नहीं थी। लेकिन छोटे लोहिया का उन्हें आशीर्वाद मिला, बात नेता जी तक पहुंची और उन्होंने टिकट दे दिया। तीन वजह थी उन्हें टिकट मिलने में, पहली ये कि वो समाजवादी नेता त्रिभुवन नाथ संडा के पुत्र थे। दूसरी बड़े समाजसेवी और तीसरी 2007 के नगर पालिका चेयरमैन के चुनाव में लोजपा से चुनाव लड़कर मात्र 256 मतों से हार गए थे। सभी मुलायम सिंह यादव के फैसले से अचंभित तो थे लेकिन नेता जी के आगे चल किसी की नहीं पाई। लोगों का मानना था कि चुनाव अनूप संडा के लिए आसान नहीं होगा लेकिन जो नतीजा आया वो सबको हैरान कर गया। अनूप संडा ने भाजपा के गढ़ में उसे मात दी। चुनाव जीतने के बाद अनूप संडा पहली बार लखनऊ में नेताजी से मिलने पहुंचे तो उनके साथ मो आजम खां समेत कई वरिष्ठ नेता बैठे हुए थे। अनूप संडा के कमरे में प्रवेश के साथ ही नेताजी के मुंह से बरबस यह निकल पड़ा, देखो जीतकर आ गया। अनूप संडा बताते हैं नेताजी के भरोसे, विश्वास व अपनेपन को वे जीवन की अंतिम सांस तक नहीं भूलेंगे।
अधिवक्ता को टिकट देकर बनवा दिया था विधायक
शहर के खैराबाद मोहल्ले में बरकत अली एडवोकेट रहते थे। वो चांदा विधानसभा जो वर्तमान में लंभुआ के नाम से जानी जाती है चुनाव लड़ते रहे और हारते रहे। 1993 में मुलायम सिंह ने उन्हें टिकट दिया और वो सुल्तानपुर सीट से जीतकर विधायक बने। समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला महासचिव मोहम्मद अहमद खां ने बताया कि उनके चाचा बरकत अली खां शुरू से मुलायम सिंह यादव से जुड़े थे। वर्ष 1980 में वे कक्षा छह में पढ़ते थे तब नेताजी सुल्तानपुर आने पर डाक बंगले में ठहरते थे। रोज शाम को नेताजी घर पर भोजन करने आते थे। उस समय पूर्व विधायक हरिचरन यादव भी पार्टी से जुड़े थे। प्रचार के दौरान जब नेताजी का कपड़ा गंदा हो जाता था तो उसे धुलने के लिए हरिचरन यादव के घर जाता था। नेताजी प्रतिदिन सुबह दूध पीते थे। वे घर से डाक बंगले दूध लेकर जाते और नेताजी को पिलाते थे। वर्ष 1989-90 के बीच का दिन था। घर पर नेताजी मुलायम सिंह यादव और बेनी प्रसाद वर्मा पहुंचे थे। नेताजी ने बेनी प्रसाद वर्मा से मजाकिया लहजे में कहा, बेनी यहां भोजन बना है, खाना नहीं। बेनी प्रसाद वर्मा के मुंह से निकला नेताजी आप जहां जाते हैं, वहां भोजन ही बनता है। इसके बाद लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े। यहां भोजन का मतलब शाकाहार से था।

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