स्वदेशी की धमक से फीकी पड़ी चाइनीज चमक, स्वदेशी सजावटी सामानों से सजी दुकानें 

लखनऊ के दीपावली बाजारों में इस बार स्वदेशी आइटमों की बहार है। रंग-बिरंगी मटका झालर, पतंग झालर, कैंडल से लेकर स्वदेशी स्टाइलिश लैंप तक लोगों को लुभा रहा है। इस बार बाजारों में करीब 70 फीसदी स्वदेशी आइटमों का कब्जा है। महज 30 फीसदी विदेशी आइटम बाजारों में नजर आ रहे हैं। इनमें भी 20 फीसदी चीनी और 10 फीसदी थाईलैंड का पुराना स्टॉक बताया जा रहा है।हर साल कारोबारी जहां विदेशी माल की डिमांड करते थे, वहीं इस बार अहमदाबाद और दिल्ली से स्वदेशी माल मंगवाने में रुचि ले रहे हैं।

लखनऊ (आरएनएस)

दिल्ली में जिन बड़े स्टॉकिस्ट के पास चीनी माल की भरमार है, वह उसको जापानी का बताकर बेच रहे है। यानी झालर, कैंडल और लैंप की पैकिंग पर जापानी कंपनियों का ठप्पा लगाकर बाजार में उतारा है। इस बार चीनी और स्वदेशी जो आइटम अब तक बाजार में आए उनमें कुछ झालर को छोड़ कर अन्य की कीमतों में भी बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। कोरोना संक्रमण और एलएसी पर उपजे विवाद के बाद राजधानी के लोग भी सबसे ज्यादा स्वदेशी की डिमांड कर रहे हैं। 

नाका हिंडोला स्थित कारोबारी नीलेश अग्रवाल टाटा ने बताया कि दीपावली बाजार में 10 फीसदी थाईलैंड के आइटम कारोबारियों ने उतारे हैं। थाईलैंड की झूमर, लोट्स कैंडल, कैंडल लैंप, मंदिर कैंडल खूब आकर्षित कर रहे हैं। इन आइटम की कीमत रिटेल में 95 रुपये से 650 रुपये तक है। वहीं दीपावली पर बिकने वाली चीनी गणेश-लक्ष्मी मूर्तियों का भी इस साल साम्राज्य खत्म हो गया। गुजरात, दिल्ली और मेरठ में इस बार स्वदेशी इंडियन गणेश लक्ष्मी की मूर्तियों को खूब तैयार किया गया है, लेकिन ये चीनी मूर्तियों के सापेक्ष चार गुनी तक महंगी है। अमीनाबाद के न्यू प्रताप मार्केट के कारोबारी अनुज अग्रवाल ने बताया कि इस बार लोग इंडियन गणेश-लक्ष्मी मूर्तियों की पूजा करेंगे। इसकी वजह चीनी गणेश-लक्ष्मी मूर्तियों का अभाव है। पर, ग्राहकों को अधिक पैसा खर्च करना पड़ेगा। जो चीनी गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति 100 से 500 रुपये में मिलती थी, उसके सापेक्ष इंडियन गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियाें की कीमत 100 रुपये से 2000 रुपये तक है।जिन दुकानों पर चीनी आइटम सज गए हैं, वह सब पुराने स्टॉक के है। इंडियन झालर की कीमत चीनी से दोगुनी है। वहीं इस बार बाजार में मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, नोएडा के आसपास बनने वाली भारतीय एलईडी झालर बाजार में उतर चुकी हैं। इसकी कीमत चीनी झालर से लगभग दोगुनी है, लेकिन चीनी झालर में जो एलईडी बल्ब लगे हैं, उसके सापेक्ष इंडियन झालर के एलइडी बल्ब का आकार थोड़ा बड़ा है। कारोबारी सतपाल सिंह मीत ने बताया कि 10 मीटर लंबी 50 बल्ब की इंडियन झालर का खुदरा रेट 70 रुपये है जबकि 15 मीटर लंबी 50 बल्ब वाली चीनी झालर की कीमत 55 रुपये है। यानी 15 मीटर लंबी इंडियन झालर की कीमत लगभग 105 रुपये आ रही है। 

महंगे हुए लक्ष्मी-गणेश

इस बार लक्ष्मी गणेश महंगे हो गए हैं। पिछले साल के मुकाबले लागत मूल्य में करीब 35-40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। कारोबारी प्रेम किशोर वर्मा बताते हैं कि मूर्ति बनाने के लिए सबसे जरूरी पीओपी और डिस्टेम्बर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा दी गई है। अखबारी कागज और पॉलीथिन की कीमत दोगुनी हो गई है। इससे मूर्तियां बनाने की लागत बढ़ गई है। कोलकाता से आ रही मूर्तियों की लागत के साथ किराया बढ़ा है।

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Rashtriya News

      

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