श्रीलंका ने चीन के सामने टेके घुटने, किया वन चाइना पॉलिसी का समर्थन

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने चीन के वन चाइना पॉलिसी का समर्थन किया है. अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव की ताइवान यात्रा के एक दिन बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति का बड़ा बयान सामने आया. उन्होंने कहा कि श्रीलंका वन चाइना पॉलिसी के लिए प्रतिबद्ध है. नेंसी पेलोसी की यात्रा के बाद चीन ताइवान को घेरने की कोशिश में है और श्रीलंका का यह कदम उसी का एक हिस्सा माना जा सकता है. पेलोसी ने बीजिंग के तमाम विरोधों के बावजूद ताइवान की यात्रा की और ताइवानी राष्ट्रपति त्साइ इंग-वेन समेत तमाम बड़े नेताओं के साथ मुलाक़ात की और चीन की तरफ से किसी भी अक्रामक स्थिति में अमेरिकी समर्थन को दोहराया.

पेलोसी पिछले 25 सालों में पहली अमेरिकी नेता हैं जिन्होंने चीन के दावे वाले आइसलैंड की यात्रा की है. चीन, पेलोसी की यात्रा की शेड्यूल जारी होने के बाद से ही विरोध कर रहा था. उनकी यात्रा संपन्न होने के बाद चीन ने ताइवान के निकट युद्धाभ्यास भी शुरु कर दिया है और ताइवान से होने वाले व्यापार को सीमित करने का भी फैसला किया है. श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने श्रीलंका में चीनी राजदूत से एच.ई क्वी झेंगझोंग से मुलाक़ात में चीन के साथ अपना समर्थन ज़ाहिर किया और उन्होंने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी.

चीन के उच्च कीमतों वाले प्रोजेक्ट से श्रीलंका में संकट !

अपने ट्वीट में उन्होंने युनाइटेड नेशन के उस चार्टर का भी ज़िक्र किया है जिसमें सोवरेनिटी और टेरिटोरियल इंटीग्रिटी की बात कही गई है. बुधवार को चीनी राजदूत की मीटिंग में उन्होंने कहा कि देशों को उकसावे से बचना चाहिए जिससे वैश्विक तनाव पैदा होते हैं. चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि दुनिया में सिर्फ वन चाइना ही है और ताइवान चीन हिस्सा है. ग़ौरतलब है कि श्रीलंका जो 1948 के बाद से सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है – वो चीन के भारी क़र्ज़ के बोझ तले दबा है. माना जाता है कि श्रीलंका में चीन के उच्च कीमतों वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की वजह से आइसलैंड देश में आर्थिक संकट पैदा हुई है.

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