तालिबान के अफगानिस्‍तान पर कब्‍जे के बाद से आतंकी संगठन आईएस- खुरासान हमलों को लेकर फिर सक्रिय 

तालिबान के अफगानिस्‍तान पर कब्‍जे के बाद से आतंकी संगठन आईएस- खुरासान को फिर हमलों को लेकर सक्रिय हो गया है। इसकी जीता जागता सबूत हाल के कुछ समय में अफगानिस्‍तान में हुए हमले हैं। आईएस-के लगातार आम आदमियों को निशाना बनाकर अपनी दहशत को फिर से कायम करने की कोशिश कर रहा है। दक्षिण अफगानिस्‍तान की शिया मस्जिद में हुए हमले की जिम्‍मेदारी भी इसी संगठन ने ली है।

बता दें कि जब तक अमेरिकी फौज अफगानिस्‍तान में थीं, तब तक आईएस किसी चूहे की भांति अपने बिल में छिपकर बैठा था। इस दौरान वो काफी सीमित भी हो गया था। लेकिन अमेरिकी फौज ही वापसी के साथ ही उसने हमले करने फिर से शुरू कर दिए।

तालिबान के लिए इन हमलों से निपटना काफी मुश्किल है। वहीं तालिबान की कमजोरी ही आईएस को मजबूती भी दे रही है। दरअसल, तालिबान के पास में न तो खुफिया नेटवर्क है और न ही वो तकनीक जिससे आईएस की मूवमेंट का पता लगाया जा सके। इसके अलावा कई दूसरी चीजों की भी कमी साफ दिखाई देती है। आईएस के राकेट हमलों को नाकाम बनाने के लिए तालिबान के पास भी कोई जरिया नहीं है। वहीं तालिबान ने आईएस से निपटने के लिए किसी भी दूसरे देश की मदद लेने से साफ इनकार कर दिया है। यही वजह है कि तालिबान इन हमलों से निपटने में नाकाम दिखाई दे रहा है।

शुक्रवार को कंधार प्रांत की इमाम बाग ए फातिमा मस्जिद पर नमाज के दौरान आईएस ने हमला किया था उसमें 47 लोग मारे गए थे। आईएस पहले भी आत्‍मघाती हमले कर चुका है। गौरतलब है कि बीते एक सप्‍ताह के अंदर ये आईएस का शिया मस्जिद पर दूसरा हमला था। रायटर के मुताबिक तालिबान ने लोगों को उनकी सुरक्षा का भरोसा दिलाया है। तालिबान की तरफ से शिया मस्जिदों और मदरसों में विशेष पुलिस बल लगाने की भी बात कही गई है।

आपको बता दें कि 15 अगस्‍त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्‍तान पर कब्‍जा कर लिया था। इसी दिन तालिबान ने काबुल समेत दूसरी जेलों में बंद सैकड़ों आतंकियों को रिहा कर दिया था। कुछ जेल से भागने में भी सफल हुए थे। इनमें आईएस-के का खूंखार अब्‍दुर रहमान अल लोगारी भी था। 16 अगस्‍त को अमेरिका ने आईएस को लेकर तालिबान और वहां की जनता को खबरदार किया। अमेरिका का कहना था कि आईएस-के फिर पांव जमाने की कोशिश में हमले कर सकता है। 22 अगस्‍त को भी इसी तरह का अलर्ट जारी किया गया था। उस वक्‍त ये अलर्ट खास तौर अमेरिकियों की सुरक्षा के मद्देनजर था।

इसके कुछ दिन बाद ही काबुल एयरपोर्ट की तरफ आते पांच राकेट को अमेरिकी डिफेंस सिस्‍टम से नाकाम कर दिया गया। 26 अगस्‍त को काबुल एयरपोर्ट के गेट पर जबरदस्‍त हमला हुआ जिसमें 26 अफगानी और 13 अमेरिकी फौज के जवान मारे गए थे। बीते देश दशक के दौरान अमेरिकी फौज पर ये सबसे बड़ा हमला था। एक के बाद एक दो धमाकों से एयरपोर्ट के बाहर अफरातफरी फैल गई थी। इसके बाद गन शाट की भी आवाजें सुनी गई थीं। इसमें लोगारी का ही नाम सामने आया था।

27 और 29 अगस्‍त को अमेरिका ने आईएस-केपी के आतंकियों पर एयर स्‍ट्राइक और ड्रोन अटैक को अंजाम दिया था। लेकिन एक रिपोर्ट में सामने आया कि 29 अगस्‍त को जो ड्रोन हमला किया गया था उसमें दस आम नागरिकों की मौत हुई थी मरने वालों में सात बच्‍चे भी थे। 8 अक्‍टूबर को आईएस-केपी ने कुंदुज स्थित शिया मस्जिद पर हमला किया था जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे।

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