संत विजय दास आत्मदाह मामले की जांच सीबीआई से हो  : अरुण सिंह

राजस्थान में अवैध खनन के विरोध में संत विजय दास आत्मदाह के मामले में गठित भाजपा की अरुण सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को रिपोर्ट सौंप दी। 23 जुलाई  को संत विजय दास आत्मदाह के मामले में एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमिटी बनाई थी जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राजस्थान के महासचिव अरुण सिंह, सीकर (राजस्थान) से सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद सत्यपाल सिंह और सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल शामिल थे।

भाजपा की इस उच्च स्तरीय समिति ने भरतपुर जिले के पासोपा गांव का दौरा किया और गांव में संतों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न स्तरों पर तथ्यों को एकत्र किया और घटना की जगह का भी दौरा किया। समिति ने उस खनन क्षेत्र का भी दौरा किया, जहां वे अवैध खनन के खिलाफ आंदोलनकारियों से मिले। समिति के सदस्यों ने भरतपुर जिले के पुलिस-प्रशासन के अफसरों से तथ्यात्मक जानकारी भी ली। अरुण सिंह ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ साधु-संतों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र भी लिखा था। उनके पत्र में स्पष्ट लिखा था कि अवैध खनन राजस्थान सरकार के संरक्षण में हो रहा है और इसमें कांग्रेस सरकार के मंत्री की संलिप्तता है। पत्र में यह भी लिखा था कि गहलोत सरकार निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है, इसलिए वे लोग सीबीआई की जांच कराने की मांग करते हैं। इस बाबत साधु-संतों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  को भी पत्र लिखा था। सधु-संतों की बात का हम भी समर्थन करते हैं। भारतीय जनता पार्टी मांग करती है कि इस पूरे मामले की सीबीआई की जांच होनी ही चाहिए।अरुण सिंह ने कहा कि जब राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, तब 2005 में ब्रज क्षेत्र के पर्वतों पर खनन को प्रतिबंधित कर दिया गया था। तब इस क्षेत्र में खनन को लेकर एक कमिटी भी बनायी गई थी। 11 नवम्बर 2005 को ब्रज 84 कोसी परिक्रमा से 500 मीटर की दूरी पर खनन को लेकर कमिटी बनायी गयी थी। 29 मई 2007 को कमिटी की रिपोर्ट आयी और उस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2008 में 202 पट्टे रद्द भी कर दिए थे। तब हमारी राज्य सरकार ने आदि बद्री पर्वत एवं कंकंचल पर्वत को 84 कोसी क्षेत्र में सम्मिलित करने का काम किया था। 12 अक्टूबर 2021 को गहलोत सरकार ने एक कमिटी बनायी और कमिटी की रिपोर्ट को लेकर कुछ निर्णय लिया लेकिन वे सभी कागजों पर ही रह गए। अवैध खनन को रोकने के लिए गहलोत सकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस क्षेत्र में खनन एक वर्ष में 17 लाख मीट्रिक टन ही होना चाहिए था किंतु नौ महीने के भीतर 30 लाख मीट्रिक टन का खनन करके पहाड़ को बिलकुल साफ कर दिया गया।अरुण सिंह ने कहा कि घटना स्थल पर जांच पड़ताल करने के बाद हमारी उच्च स्तरीय समिति ने रिपोर्ट तैयार की है। उन्होंने कहा कि घटना स्थल का दौरा करने पर हमने काफी हृदय विदारक स्थिति को देखा। स्थानीय लोगों में राजस्थान सरकार के प्रति काफी गुस्सा और आक्रोश दिखा। एक संत ने अवैध खनन और राजस्थान सरकार की बारंबार अनदेखी के विरोध में अपने प्राणों की आहुति दी। इस घटना को लेकर आसपास के गांव के लोगों ने स्वयं आकर भाजपा की जांच समिति से मुलाक़ात की। उनका एक ही आग्रह था कि संत विजय दास जी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। सिंह ने कहा आदि बद्री और कंकंचल, ये दोनों पर्वत ब्रज क्षेत्र के 84 कोस परिक्रमा के अंतर्गत आते हैं और दोनों ही पूजा स्थली है। 84 कोस परिक्रमा क्षेत्र देश भर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी है। इन दोनों क्षेत्रों में अवैध खनन लगातार हो रहा था। ये अवैध खनन इतने व्यापक स्तर पर हो रहा था कि अब वहां पर पर्वतीय जमीन बिलकुल सपाट हो चले हैं। अवैध खनन से जमीन और पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है। इसी अवैध खनन के विरोध में स्वामी विजय दास जी समेत अन्य संत धरने पर बैठे थे। उन्होंने लगभग 551 दिन धरना दिया लेकिन इसके बावजूद राजस्थान सरकार के संरक्षण में खनन माफिया अवैध खनन करते रहे और पत्थरों की ढुलाई करते रहे। साधु-संतों की एक मात्र मांग थी कि ब्रज क्षेत्र में खनन को तत्काल रोका जाए लेकिन राजस्थान की कांग्रेस सरकार अवैध खनन को संरक्षित करती रही और खनन माफियाओं को छूट देती रही।

राष्ट्रीय न्यूज़

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