टीबी नोटिफिकेशन में बड़े शहरों के प्राइवेट डाक्टर दिखाएँ बड़ा दिल-डॉ. भटनागर

उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने में सरकारी और प्राइवेट डाक्टरों को मिलकर काम करने की जरूरत है। सरकारी डाक्टर जहाँ एक ओर टीबी मरीजों के इलाज के साथ उन्हें शत-प्रतिशत नोटिफाई करने में जुटे हैं वहीं, प्राइवेट डाक्टर नोटिफिकेशन में अभी भी पूरी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। हालाँकि उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों की तुलना में कुछ छोटे शहरों के प्राइवेट डाक्टरों ने टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन में मिसाल पेश की है।

लखनऊ (आरएनएस)

सेंट्रल टीबी डिविजन की वेबसाइट से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में इस साल पहली जनवरी से 27 अक्टूबर तक कुल 413136 टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन पोर्टल पर हुआ है, जिसमें सरकारी क्षेत्र में 303661 तो प्राइवेट में 109475 नोटिफाई हुए हैं। प्रदेश के मथुरा और संभल दो ऐसे जिले हैं जहाँ के प्राइवेट डाक्टरों ने बड़ी संख्या में टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन कर मिसाल पेश की है। मथुरा में सरकारी क्षेत्र में 3290 तो प्राइवेट में 6952 टीबी मरीज अब तक पोर्टल पर नोटिफाई हुए हैं। इसी तरह संभल में सरकारी में 1652 तो प्राइवेट में 2181 मरीज नोटिफाई हुए हैं। ललितपुर में भी सरकारी और प्राइवेट डाक्टर टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन में तकरीबन बराबर ही हैं,यहाँ सरकारी में 1484 तो प्राइवेट में 1397 नोटिफिकेशन हुए हैं। इन छोटे जिलों की अपेक्षा लखनऊ जैसे बड़े मेट्रोपोलिटन जिलों के प्राइवेट डाक्टरों को नोटिफिकेशन में बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है। लखनऊ में इस साल सरकारी में 13222 तो प्राइवेट में 4333, वाराणसी में सरकारी में 8417 तो प्राइवेट में 4015, आगरा में सरकारी में 9419 तो प्राइवेट में 6552, अलीगढ़ में सरकारी में 8951 तो प्राइवेट में 3606, प्रयागराज में सरकारी में 8558 तो प्राइवेट में 3326 टीबी मरीजों का ही नोटिफिकेशन हुआ है। इस बारे में राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर का कहना है कि प्राइवेट डाक्टर को प्रति टीबी मरीज के नोटिफिकेशन पर 500 रुपये और सफलतापूर्वक इलाज पूरा होने पर 500 रुपये दिए जाते हैं। शत-प्रतिशत टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नवम्बर माह में मंडल मुख्यालय पर सम्बन्धित जिलों के प्राइवेट डाक्टरों की संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित कर उनसे हर टीबी मरीज के नोटिफिकेशन में मदद की अपील की जायेगी। टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन इसलिए बहुत जरूरी है क्योंकि इससे जहाँ एक ओर मरीजों की शीघ्र पहचान हो सकेगी। वहीं, जल्दी से जल्दी उनका उपचार शुरू कर बीमारी से मुक्ति दिलाई जा सकेगी। देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को साकार करने को लेकर इस समय प्रधानमन्त्री से लेकर प्रधान तक मिशन मोड में हैं। कोई निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को पोषाहार मुहैया कराने के साथ ही भावनात्मक सहयोग प्रदान करने में जुटा है तो कोई घर-घर दवा पहुंचाकर नियमित सेवन को सुनिश्चित कराने में लगा है। इसी के तहत हर टीबी मरीज को पोर्टल पर नोटिफाई करने पर भी पूरा जोर है।

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