जानें आयुर्वेद के मुताबिक क्यों रोज़ाना करना चाहिए तिल के तेल का उपयोग 

सरसों के तेल से लेकर ज़ैतूल और नारियल तेल तक, बाज़ार में आपको कई तरह के तेल मिल जाएंगे, लेकिन आयुर्वेद में तिल के तेल का महत्व एक अलग स्तर का है। तिल के छोटे-छोटे बीजों का उपयोग हज़ारों सालों से आयुर्वेदिक औषधियां तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता रहा है।

कई तरह की स्वास्थ्य स्थितियों को ठीक करने के लिए उपयोग की जाने वाली सभी आयुर्वेदिक दवाओं में से लगभग 40 प्रतिशत में तिल का उपयोग किया जाता है। पाउडर, पेस्ट या तेल, कई तरीकों से इन बीजों का पारंपरिक भारतीय चिकित्सा में कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।

पोषक गुणों से भरपूर तिल का तेल

तिल का तेल तिल के बीजों से बनाया जाता है, जिसे खाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। दूसरे तेलों से ज़्यादा स्वाद वाले इस तेल को बाकी तेलों की तरह रिफाइन करने की ज़रूरत नहीं होती। दवाओं में इस्तेमाल के अलावा चीन, जापान, कोरिया जैसी एशिया और मिडल ईस्ट देशों में इसे खाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। एक चम्मच तिल के तेल में 120 कैलोरी, 14 ग्राम वसा होती है और प्रोटीन, कार्ब्ज़, फाइबर और चीनी की मात्रा बिल्कुल नहीं होती।

तिल के तेल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड्स की तरह स्वस्थ फैट्स भी होते हैं। तिल के दो मुख्य एंटीऑक्सिडेंट- सेसमोल और सेसमिनॉल- के शक्तिशाली प्रभाव होते हैं और ज्यादातर उनके अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के लिए श्रेय दिया जाता है।

तिल के तेल को डाइट में क्यों शामिल करना चाहिए?

त्वचा को देता है पोषण

आयुर्वेद में तिल के तेल की मालिश को महत्वपूर्ण माना गया है। दूसरे तेलों के मुकाबले तिल के तेल को इसलिए अहमियत दी जाती है क्योंकि यह त्वचा में गहराई तक जाता है। यह आपकी त्वचा की निचली परत तक पहुंचता है और उसे पोषण देता है। तेल में विटामिन-ई भी होता है, जो त्वचा की कोशिकाओं को यूवी किरणों, प्रदूषण और विषाक्त पदार्थों से बचाने में मदद कर सकता है।

प्राकृतिक तौर पर गर्म होता है

तिल के तेल का शरीर को गर्माहट देता है और सर्दियों में मालिश के लिए बेस्ट है क्योंकि यह आपकी त्वचा को ख़ुश्क मौसम से बचाता है। इसे मांसपेशियों का दर्द, खांसी और ज़ुकाम कम होती है। तिल के तेल से मालिश करने से आप गर्म, शांत महसूस कर सकते हैं और अपने वात को भी संतुलित कर सकते हैं। हालांकि, गर्मियों में तिल के तेल का उपयोग सही नहीं है क्योंकि यह गर्म होता है।

इसे पचाना आसान है

दूसरे तेलों की तुलना, तिल के तेल को पचाना आसान है। तिल के तेल में फाइबर मौजूद होता है, जिससे खाने को पचाना आसान हो जाता है, बेहतर मल त्याग की सुविधा देता है और कब्ज़ की संभावना को कम करता है। अपने एंटी-इंफ्लामेटरी गुणों की वजह से तिल का तेल जोड़ों में सूजन, दांत में दर्द और खिचांव में भी मददगार साबित होता है।

आर्थ्राइटिस में फायदेमंद

आर्थ्राइटिस में अक्सर जोड़ों में दर्द या सूजन देखी जाती है, ऐसे में तिल का तेल काफी फायदा पहुंचाता है। कई शोध में ये साबित हुआ है कि तिल का तेल आर्थ्राइटिस के दर्द से राहत दिलाने का काम करता है। न सिर्फ यह बल्कि इस छोटे से बीज के तेल को चोटों और जलने पर भी लगाया जा सकता है।

नींद में सुधार ला सकता है

जो लोग नींद न आने की दिक्कत से जूझते हैं, उनके लिए तिल का तेल एक अच्छा उपाय है। शोध के मुताबिक, तिल के तेल की कुछ बूंदों को लेकर सिर की मालिश करने से आपको नींद अच्छी आ सकती है। जिससे आपकी ज़िंदगी बेहतर हो सकती है।

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