रानीखेत पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए बड़ी राहत, छावनी पर‍िषद के सभी टैक्स बैरियरों पर वाहन प्रवेश शुल्क समाप्त

रक्षा मंत्रालय ने छावनी परिषद के सभी टैक्स बैरियरों पर वाहन प्रवेश शुल्क को समाप्त कर दिया है। इससे बाहरी क्षेत्रों से पहुंचने वाले सैलानियों व आम लोगों को जहां बड़ी राहत मिली है। दूसरी तरफ कुमाऊं के एकमात्र छावनी क्षेत्र में प्रवेश शुल्क वसूली पर रोक से कैंट बोर्ड को रोजाना 35 से 40 हजार जबकि सालाना करीब डेढ़ करोड़ रुपये की आय बंद हो गई है। वहीं तीन मुख्य बैरियरों पर आउटसोर्सिंग से तैनात 22 कर्मचारियों पर बेरोजगारी की तलवार लटक गई है।

केआरसी मुख्यालय स्थित छावनी परिषद के घिंघारीखाल, पिलखोली व गनियाद्योली में टैक्स बैरियर संचालित थे। बाहरी राज्यों व शहरों से आने वाले पर्यटक हों या आम वाहन चालक उन्हें नगर में प्रवेश के लिए इन बैरियर पर शुल्क देना होता था। मगर रक्षा मंत्रालय ने कैंट के इन टैक्स बैरियर पर प्रवेश शुल्क की वसूली पर रोक लगा दी है। महानिदेशक (दिल्ली) फिर लखनऊ स्थित रक्षा संपदा मुख्यालय से छावनी कार्यालय में आदेश पहुंचने के तुरंत बाद ही इस पर अमल शुरू कर दिया गया। तीनों प्रवेश द्वारों पर झुके बैरियर उठा दिए गए। 

2012 से चली आ रही थी व्यवस्था 

1991 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी नगरों के प्रवेशद्वारों पर ली जाने वाली चुंगी व्यवस्था को खत्म कर दिया था। इधर कैंट एक्ट में संशोधन कर वर्ष 2006 में टोल टैक्स के बजाय वाहन प्रवेश शुल्क की व्यवस्था शुरू की। यह वसूली प्रक्रिया 2012 से प्रभावी हुई जो अब तक चली आ रही थी। 

सीइओ स्तर से तय होगा भाग्य 

वाहन प्रवेश शुल्क को समाप्त किए जाने के बाद बैरियर्स पर तैनात आउट सोर्सिंग कार्मिकों का भविष्य क्या होगा, इस पर मुख्य अधिशासी अधिकारी स्तर से निर्णय लिया जाएगा। कैंट सूत्रों के मुताबिक इन कर्मचारियों के रोजगार पर संकट छाने के बाद इनके समायोजन पर भी मंथन शुरू कर दिया गया है। 

कैंट बोर्ड को डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिवर्ष घाटा

अधीक्षक टोल टैक्स कैंट बोर्ड गोपाल राम आर्या ने बताया कि उच्च स्तर से आदेश आने के बाद सभी तीन मुख्य बैरियरों पर वाहन प्रवेश शुल्क वसूली बंद कर दी गई है। यहां आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का समायोजन किया जा सकता है या नहीं, इसका निर्णय सीइओ स्तर से ही लिया जाएगा। एंट्री फीस पर रोक से कैंट बोर्ड को डेढ़ करोड़ रुपये प्रतिवर्ष घाटा उठाना पड़ेगा।

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