जानिए कैसे रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना विदेश में शिक्षा को कर सकता है महंगा  

घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी के रुख और निवेशकों की धारणा में मजबूती के चलते गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 30 पैसे टूटकर 77.55 पर आ गया। रुपये का गिरना अर्थव्यवस्था में कई चीजों को प्रभावित करता है, मसलन निवेश (Investment), आयात बिल (Import Bill) और यहां तक ​​कि विदेशी शिक्षा (overseas education) पर।

जानकारों की मानें तो रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना विदेशी शिक्षा को महंगा बनाता है। विदेश में पढ़ाई का खर्च रुपये और डॉलर की चाल पर निर्भर करता है। पैरेंट्स को अपने बच्‍चे को विदेश भेजने से पहले इसे समझना जरूरी है। खासकर वह पढ़ाई के लिए बच्‍चे को किस देश भेज रहे हैं, इसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के बारे में जानना जरूरी है। रुपये के कमजोर होने पर विदेश में पढ़ रहे बच्‍चे के अभिभावक के लिए अपनी गाढ़ी कमाई से खर्च उठाना भारी पड़ सकता है। ऐसे में उस देश में कुछ पैसे का निवेश ऐसी मुसीबत से बचने का बेहतर उपाय है। दूसरे बाजारों में भी निवेश किया जा सकता है।

यही नहीं विदेश यात्रा पर भी रुपये के गिरने का असर पड़ेगा। क्‍योंकि अगर आप नकद लेकर विदेश जाएंगे तो आपको उसे स्‍थानीय मुद्रा में बदलने में कम रकम मिलेगी। इसलिए अगर विदेश यात्रा की तैयारी है तो कुछ बैंक जीरो मार्कअप क्रेडिट कार्ड मुहैया कराते हैं, उससे विदेश में खर्च आसान हो जाता है। प्रीपेड कार्ड भी अच्‍छा ऑप्‍शन हो सकता है। इसके अलावा बाहर से सामान आयात के बिल पर भी असर पड़ेगा। आयातकों को ज्‍यादा पेमेंट करना होगा।

सूत्रों के मुताबिक रिजर्व बैंक अगले महीने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में मुद्रास्फीति अनुमान बढ़ा सकता है और उस पर काबू पाने के लिए दरों में बढ़ोतरी पर भी विचार करेगा। आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली एमपीसी की बैठक 6 जून से 8 जून के बीच होनी है। खुदरा मुद्रास्फीति को 2-6 प्रतिशत के दायरे में रखने के लिए इसे अनिवार्य किया गया है।

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