खादी ग्रामोद्योग आयोग पर कोरोना महामारी का असर नहीं, आयोग ने इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ कारोबार किया

खादी आयोग का रिकॉर्ड प्रदर्शन इसलिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि पिछले साल 25 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद उत्पादन गतिविधियाँ तीन महीने से अधिक समय तक निलंबित रहीं थी

वर्ष 2020-21 कोविड-19 महामारी से पूरी तरह से प्रभावित रहा। बावजूद इसके इस साल खादी और ग्रामोद्योग आयोग (Khadi and Village Industries Commission) ने अपना अब तक का सबसे अधिक कारोबार दर्ज किया है। आयोग ने वर्ष 2020-21 में 95,741.74 करोड़ रुपये का सकल वार्षिक कारोबार दर्ज किया। पिछले वर्ष यानी 2019-20 में हुए 88,887 करोड़ रुपए के कारोबार में इस साल करीब 7.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है।

लॉकडाउन का आयोग पर असर नहीं

खादी आयोग का रिकॉर्ड प्रदर्शन इसलिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि पिछले साल 25 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद उत्पादन गतिविधियाँ तीन महीने से अधिक समय तक निलंबित रहीं थी। इस अवधि के दौरान सभी खादी उत्पादन इकाइयाँ और बिक्री आउटलेट बंद रहे जिससे उत्पादन और बिक्री बुरी तरह प्रभावित हुई। हालांकि, खादी आयोग तेजी से प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान पर तेजी से काम किया। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री, श्री नितिन गडकरी के अनोखे मार्केटिंग आइडिया ने केवीआईसी की उत्पाद श्रृंखला को और विविधता प्रदान की,  स्थानीय उत्पादन को बढ़ाया और खादी के क्रमिक विकास का मार्ग प्रशस्त किया।

नए उत्पादों से कारोबार में वृद्धि

खादी ई-पोर्टल, खादी मास्क, खादी फुटवियर, खादी प्राकृतिक पेंट और खादी हैंड सैनिटाइज़र आदि का शुभारंभ, नई प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) इकाइयों की रिकॉर्ड संख्या की स्थापना, नए स्फूर्ति क्लस्टर, स्वदेशी’ के लिए सरकार की पहल और खादी आयोग का अर्धसैनिक बलों के सामाग्री की आपूर्ति करने के ऐतिहासिक समझौते से महामारी के इस दौर में केवीआईसी के कारोबार में वृद्धि हुई। ग्रामोद्योग ने 2019-20 में 65,393.40 करोड़ रुपए के खादी उत्पादन की तुलना में 2020-21 में 70,329.67 करोड़ रुपए का उत्पादन किया। इसी तरह से वित्त वर्ष 2020-21 में ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री 92,214.03 करोड़ रुपए की हुई। जबकि 2019-20 में यह आंकड़ा 84,675.29 करोड़ का था।

ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि

केवीआईसी के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि महामारी के दौरान लोगों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और “वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को पूरे जोश से पूरा किया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान केवीआईसी का खास ध्यान कारीगरों और बेरोजगार युवाओं के लिए स्थायी रोजगार सृजित करना था। आर्थिक संकट का सामना करते हुए, बड़ी संख्या में युवाओं ने पीएमईजीपी के तहत स्वरोजगार और विनिर्माण गतिविधियों को अपनाया जिससे ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्पादन में वृद्धि हुई। साथ ही, स्वदेशी उत्पादों को खरीदने की प्रधानमंत्री की अपील के बाद खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

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