कट्टर ईमानदारी से घोर भ्रष्टाचारी तक का सफर केजरीवाल ने बहुत जल्दी पूरा कर लिया : कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता  रागिनी नायक ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर शाराब घोटाले को लेकर तंज कसते हुए कहा कि ये दाग़ दाग़ उजाला, ये शब-गज़ीदा सहर, वो इंतिज़ार था जिस का ये वो सहर तो नहीं । रागिनी नायक ने कहा कि ईमानदारी और पारदर्शिता की नींव पर वैकल्पिक राजनीति की बड़ी ईमारत खड़ी करने का बड़ा दावा करके दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी, किस तरह सरेआम बेनकाब हो रही है, ये बात बहते पानी की तरह साफ है। कट्टर ईमानदारी से घोर भ्रष्टाचारी तक का सफर केजरीवाल एंड कंपनी ने बहुत जल्दी पूरा कर लिया।

राष्ट्रीय(आरएनएस)

 चोर-चोर मौसेरे भाई, तो भाजपा, केजरीवाल जी की पार्टी और उनके नेताओं से एक कदम भी पीछे नहीं हैं, शराब माफियाओं के साथ सांठ-गांठ करने में, पैसा उगाही करने में, ब्लैक लिस्टेड कंपनियों से चंदा लेने में, इस बात का खुलासा दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आदरणीय अनिल चौधरी जी करेंगे। पर पहले तीन सवाल बहुत ही प्रमुख तीन सवाल, जो आम आदमी पार्टी से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पूछना चाहती है। रागिनी नायक ने कहा कि दिल्ली की जनता को जानकारी दे कि उनकी शराब नीति उनके हिसाब से सही है या गलत है। अगर सही है, तो सीबीआई जांच की खबर आते ही ये डर के मारे टांगे क्यों कांपने लगीं? जिस नीति को लाभकारी बताते थे, जिस नीति को दिल्ली को रेवेन्यू सरप्लस बनाने की सबसे मजबूत कड़ी बताते थे, उस नीति को वापस क्यों लेना पड़ा? वापस लेकर उन्हीं शीला दीक्षित, जिनके बारे में बेईमान-बेईमान लिखकर पोस्टर ऑटो के पीछे चिपकाए जाते थे, उन्हीं शीला दीक्षित जी की नीति की शरण में क्यों आना पड़ा, ये तो बताना चाहिए और अगर वो यह कहते हैं कि नीति सही नहीं थी, इसलिए वापस ली तो गलत नीति पर मनीष सिसोदिया के खिलाफ कार्यवाही क्यों न हों, ये भी बताना चाहिए। गलत काम करेंऔर सीबीआई की जांच न हो, ये आम आदमी की तो डिमांड नहीं हो सकती, ये तो बड़ा वीवीआईपी कल्चर है, हम नेता है, हम मंत्री हैं, तो हमारी जांच भी नहीं हो सकती। कितने दूध के धुले हैं, मनीष सिसोदिया, क्या इस बात का, दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होना चाहिए? ये पहला सवाल है। लोकतांत्रिक मूल्यों में जो भी व्यक्ति, नेता, राजनैतिक दल विश्वास करता है, मैं समझती हूँ कि उसका कर्तव्य बन जाता है कि अगर उन्हीं लोकतांत्रिक मूल्यों का कोई हनन करने की कोशिश कर रहा है, पैसों का लालच देकर पार्टी तोडऩे की कोशिश कर रहा है, अलग-अलग किस्म के प्रलोभनों के जरिए, संघीय ढांचे पर चोट करने की कोशिश कर रहा है और मनीष सिसोदिया जी को फोन करके एकनाथ शिंदे बनाकर पार्टी में दो फाड़ करने की कोशिश कर रहा है, तो उस आदमी का नाम और फोन नंबर आप सार्वजनिक करें। किसे बचाना चाहते हैं आप? किसकी मदद करना चाहते हैं आप? कहीं ऐसा तो नहीं कि ‘एÓ टीम और ‘बीÓ टीम का खेल फिर से शुरु हो गया है? हिमाचल औऱ गुजरात के मद्देनजर ये भाजपा और आम आदमी पार्टी की अगर साठगांठ नहीं है, तो मैं समझती हूँ कि पहली फुर्सत में एक प्रेस वार्ता करके यह बताना चाहिए कि वो कौन लोग हैं भाजपा के, जो 70 विधायकों में से 62 विधायकों की पार्टी को भी तोडऩे की चेष्ठा कर रहे हैं? अब आप खुद ही ये अंकगणित कर लीजिए कि 62 विधायकों का दो तिहाई कितना होगा औऱ उसके लिए क्या-क्या करना पड़ेगा, वैसे समय-समय पर मोदी जी साम, दाम, दंड और भेद से सरकारें गिराने की चेष्ठा करते रहते हैं, इसीलिए अगर हो रहा है, तो आप सार्वजनिक करिए, ये जरुरी है। पंजाब में इनकी सरकार है, आम आदमी पार्टी की सरकार है, स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगता है और वो ढोल-नंगाड़े के साथ पूरे देश में बताते हैं कि हमने अरेस्ट कर लिया, ये नहीं बताते कि संगरूर में चुनाव था और तालियों के साथ वोट भी बंटोरने थे। पूरे देश में ढोल-नंगाड़े बजते हैं, अरेस्ट कर लिया, अरेस्ट कर लिया, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री को अरेस्ट कर लिया। दिल्ली में मुख्य सचिव की रिपोर्ट आ जाती है, 144 करोड़ के घोटाले का खुलासा हो जाता है, सीबीआई की जांच, सीबीआई की एफआईआर आ जाती है, लेकिन मनीष सिसोदिया से इस्तीफा लेने के बजाय, केजरीवाल उन्हें भारत रत्न देना चाहते हैं। एक भ्रष्टाचारी को भारत रत्न देने की बात हो रही है। कमाल की बात ये भी है कि वहाँ का स्वास्थ्य मंत्री भी जेल में है, यहाँ का स्वास्थ्य मंत्री भी जेल में है। दो-ढाई महीने से जेल की हवा खा रहे हैं, याद्दाश्त चली गई, लेकिन इस्तीफा नहीं लिया गया, बर्खास्त नहीं किया गया। दिल्ली का स्वास्थ्य मंत्रालय कौन चला रहा है? याद्दाश्त गए हुए व्यक्ति जेल से चला रहे हैं या उनके बिहाफ़ पर कोई डिफैक्टो चला रहा है, किसी को मालूम नहीं है औऱ मालूम कैसे हो, ये तो मुख्यमंत्री ही ऐसे हैं, जिन्होंने कोई पोर्टफोलियो ही नहीं लिया हुआ है। दिल्ली की कोई जिम्मेदारी नहीं है उनके पास ताकि देश की राजनीति में पैर पसार सकें। तो ये जानना चाहती है भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अगर कोई केजरीवाल का करीबी भ्रष्टाचार करेगा, तो क्या ऐसे भ्रष्टाचारी को सौ खून माफ हैं? मनीष सिसोदिया पर कोई कार्यवाही नहीं होगी, या फिर ये मान लिया जाए कि ये तार सीधे मुख्यमंत्री के साथ ही जुड़े है, शराब माफिया से पैसा उगाही सिर्फ मनीष सिसोदिया तक ही सीमित नहीं है, केजरीवाल के हाथ भी इसमें रंगे हुए हैं और शायद इसलिए मनीष सिसोदिया का इस तरीके से बचाव हो रहा है।

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