जर्मनी के नौसेना प्रमुख के दावे से तिलमिलाया चीन,राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए विकसित कर रहे सैन्य क्षमता

दक्षिण चीन सागर में आक्रामक रुख और हिंद महासागर में दबदबा बढ़ाने वाला चीन अपनी नौसेना को लेकर किए जर्मनी के नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल के-अचिम शानबैक के दावे से तिलमिला गया है। शानबैक ने बुधवार को कहा था कि चीन हर चार साल में पूरी फ्रांसीसी नौसेना के बराबर अपनी नौसेना का आकार बढ़ा रहा है। ऐसे में बीजिंग की बढ़ती नौसैन्य शक्ति चिंता की बात है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, मुझे नहीं लगता कि इस तरह की चिंताएं जताई जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि चीन विश्व शांति का निर्माता है। झाओ ने कहा, चीन अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी सैन्य क्षमता विकसित कर रहा है। यदि कोई देश चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को खतरे में डालने या नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं रखता है, तो उसे चीन की सैन्य ताकत से कभी कोई खतरा नहीं होगा।

चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति ‘विस्फोटक’ और चिंता का विषय

बता दें कि शानबैक ने सिंगापुर में कहा था कि चीन की बढ़ती नौसैनिक शक्ति ‘विस्फोटक’ और चिंता का विषय है। चीन को अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित आदेश का पालन करना चाहिए। बता दें कि तेल और गैस से संपन्न दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर चीन अपना दावा करता है। जबकि वियतनाम, फिलीपींस, ब्रुनेई समेत कई अन्य देश इस दावे को खारिज करते हैं।

मध्यम दूरी की मिसाइलों की अमेरिका की तैनाती पर चीन ने किया विरोध

वहीं, दूसरी ओर चीन ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र और यूरोप में जमीन पर आधारित मध्यम दूरी की मिसाइलों की अमेरिका की तैनाती का कड़ा विरोध किया है। पिछले दिनों चीनी विदेश मंत्रालय ने बताया कि चीन ने कई बार मध्यम दूरी की मिसाइलों के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से व्यक्त की है और अमेरिका द्वारा एशिया-प्रशांत क्षेत्र और यूरोप में किसी भी रूप में मध्यम दूरी की जमीन पर आधारित मिसाइलों की तैनाती का कड़ा विरोध किया है।

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