पाकिस्तानी अदालत से मंजूरी मिलने के बाद शिहाब चित्तूर ने वाघा-अटारी के रास्ते एंट्री ली..

पाकिस्तान का वीजा मिलने के बाद भारतीय नागरिक शिहाब चित्तूर ने आखिरकार पाकिस्तान प्रवेश कर लिया है। पाकिस्तानी अदालत से मंजूरी मिलने के बाद शिहाब चित्तूर ने वाघा-अटारी के रास्ते पाकिस्तान में एंट्री ली। इस दौरान शिहाब ने खुशी जताई।

 भारतीय नागरिक शिहाब चित्तूर अब अपनी हज यात्रा को पैदल ही पूरा कर सकेंगे। पाकिस्तान की एक अदालत ने शिहाब चित्तूर को देश में प्रवेश करने की मंजूरी दे दी। जिसके बाद शिहाब ने अटारी-वाघा के रास्ते पाकिस्तान में प्रवेश किया। इस दौरान सरवर ताज ने उनका स्वागत किया।

शिहाब चित्तूर ने पाकिस्तान में किया प्रवेश

दरअसल, इससे पहले पाकिस्तान की एक अदालत ने एक भारतीय नागरिक को वीजा देने से मना कर दिया था। करीब चार महीने से शिहाब चित्तूर पाकिस्तान का वीजा न होने के कारण अपनी यात्रा को आगे जारी नहीं रख पाए थे। हालांकि, शिहाब चित्तूर की ओर से भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान के अध्यक्ष इम्तियाज राशिद कुरैशी और सरवर ताज ने पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी।

लाहौर निवासी ने शिहाब की ओर से दायर की थी याचिका

लाहौर के निवासी सरवर ताज ने लाहौर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया कि शिहाब को सऊदी अरब की यात्रा करने की अनुमति देने के लिए ट्रांजिट वीजा दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया था कि जिस तरह पाकिस्तान सरकार गुरु नानक की जयंती और अन्य अवसरों पर भाग लेने के लिए भारत के सिख तीर्थयात्रियों को वीजा जारी करती है, उसी तरह उसे शिहाब को भी वीजा देना चाहिए।

लाहौर हाई कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

हालांकि, लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि याचिकाकर्ता भारतीय नागरिक से संबंधित नहीं है और न ही उसके पास अदालत जाने के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी थी। इसके बाद में सरवर ताज ने इस फैसले को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। राशिद कुरैशी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि मक्का की अपनी यात्रा जारी रखने के लिए वीजा मिलने से शिहाब बहुत खुश हैं।

वाघा-अटारी सीमा पर आकर रुकी शिहाब की यात्रा

कुरैशी ने कहा कि वह प्यार, दोस्ती और भाईचारे का संदेश लेकर आए हैं। बता दें कि केरल के रहने वाले शिहाब ने पिछले साल अक्टूबर में अपने गृह राज्य से हज के लिए पैदल यात्रा शुरू की थी, लेकिन उनकी ये यात्रा वाघा-अटारी बॉर्डर पर आकर रुक गई थी। इसकी एक बड़ी वजह शिहाब के पास पाकिस्तान का वीजा नहीं होना था।

शिहाब ने ट्रांजिट वीजा के लिए किया था अप्लाई

एक संघीय जांच एजेंसी ने कहा था कि शिहाब ने आव्रजन अधिकारियों से अनुरोध किया कि वह पैदल हज करने जा रहा है और वह पहले ही 3,000 किलोमीटर की यात्रा कर चुका है और उसे मानवीय आधार पर देश में प्रवेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए। वह ईरान के रास्ते सऊदी अरब पहुंचने के लिए ट्रांजिट वीजा चाहता था, लेकिन शिहाब को उस दौरान वीजा नहीं मिल पाया था। हालांकि, अब शिहाब ने पाकिस्तान में प्रवेश कर लिया था।

क्या होता है हज

बता दें कि इस्लाम में पांच फर्ज है, जिनमें से एक हज करना भी शामिल है। इस्लाम में हज यात्रा का इस्लाम में बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि हर एक मुसलमान को अपनी जिंदगी में एक बार हज यात्रा पर जाना चाहिए। हज यात्रा साल में एक बार होती है। बकरीद (ईद-उल-अजहा) के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लाखों लोग हज यात्रा के लिए सऊदी अरब के मक्का शहर जाते हैं और ये ईद उल अज़हा के साथ पूरी होती है।

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