भारत ने अग्नि-5 मिसाइल का किया सफल परीक्षण, 5000 km दूर तक साध सकती हैं निशाना

नई दिल्ली: सामरिक बल कमान (एसएफसी) ने गुरुवार शाम को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि V बैलिस्टिक मिसाइल का पहला उपयोगकर्ता परीक्षण किया, ताकि निर्धारित समय के भीतर 5000 किमी दूर अपने लक्ष्य तक पहुंचने वाली मिसाइल के साथ रात के संचालन को मान्य बनाया जा सके।

मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के टेलीमेट्री व रडार जहाजों द्वारा ट्रैक किया गया था। उसने निर्धारित मापदंडों के अनुसार सही उड़ान प्रक्षेपवक्र लिया और 15 से 18 मिनट के भीतर लक्ष्य को हिट कर दिया। यह बैलिस्टिक मिसाइल का आठवां सफल परीक्षण था, जो चीन की बढ़ी हुई मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता और पाकिस्तान की परमाणु महत्वाकांक्षा की पृष्ठभूमि में भारत की न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता के मूल में है।

इसके बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, अग्नि V मिसाइल, जिसने शाम 7.50 बजे उड़ान भरी, वह वारहेड वजन सहित स्‍टेंडर्ड कंफ्रीगेशन की थी। इसने आसानी से सही समय के अंदर लक्ष्‍य को मार गिराया, जिससे उपयोगकर्ता और डेवलपर दोनों संतुष्‍ट थे। रात के परीक्षण के पीछे का मकसद यह परीक्षण करना था कि उपयोगकर्ता, एसएफसी, दिन और रात के संचालन मोड में हथियार को संभाल सकता है या नहीं।

यह समझा जाता है कि मिसाइल पूरी तरह से विकसित है और आवश्यकता के मामले में आगे के परीक्षण करने के लिए स्वतंत्र रूप से एसएफसी के साथ शामिल है। अग्नि V मिसाइल उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली के साथ सतह से सतह पर मार करने वाली तीन चरणों वाली ठोस ईंधन वाली मिसाइल है।

अग्नि V परीक्षण डीआरडीओ द्वारा 28 जून, 2021 को ओडिशा से 1000 से 2000 किलोमीटर के बीच की दूरी के साथ नई पीढ़ी की अग्नि प्राइम मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण करने के बाद आता है। नई पीढ़ी की मिसाइल अंततः इस सीमा के भीतर सभी अग्नि मिसाइलों को बदल देगी, क्योंकि प्राइम सीरीज़ अधिक कुशल, कम बोझिल और मिश्रित फाइबर व कनस्तर आवरण प्रणाली दोनों का उपयोग करने वाला एक अत्यधिक सटीक मंच है। मिसाइल को मोबाइल लॉन्चर और ट्रेनों से दागा जा सकता है, जो दूसरे हमले के लिए हथियार के अस्तित्व में मदद करता है क्योंकि भारत पहले इस्तेमाल न करने की नीति के लिए प्रतिबद्ध है। मिसाइलों की अग्नि श्रृंखला भारत के परमाणु त्रय का हिस्सा है, जिसमें राफेल और यहां तक कि मिराज 2000 एच जैसे लड़ाकू विमानों और समुद्र से आईएनएस अरिहंत जैसी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के माध्यम से परमाणु हथियार पहुंचाने की क्षमता है।

भारत को अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष के दौरान अपनी दूसरी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिघाट को चालू करने की उम्मीद है। डेवलपर्स समुद्र में लॉन्च की गई बैलिस्टिक मिसाइल पर भी काम कर रहे हैं, जिसकी रेंज अग्नि V मिसाइल के समान है। भारतीय परमाणु त्रय इस सीमा तक सीमित रहने की उम्मीद है, जब तक कि सरकार एशिया में सुरक्षा परिदृश्य बिगड़ने की स्थिति में लंबी दूरी तय करने का फैसला नहीं करती है। अपनी ओर से मिसाइल डेवलपर्स को भरोसा है कि वे 5000 किमी की सीमा से कहीं आगे तक पहुंच सकते हैं।

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