अफगानिस्तान में आए भीषण भूकंप के बाद हर जगह तबाही और लाचारी का मंजर नजर….

अफगानिस्तान में बुधवार को आए भीषण भूकंप के बाद बिना ठीक रास्तों के राहत टीमों का पीडि़तों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। मलबों में अभी भी काफी लोगों के दबे होने की आशंका है। वहीं, पीडि़त परिवार के लोग नंगे हाथों से मलबे खोदकर अपनों की तलाश में जुटे हैं। इस बीच, दुनियाभर से मानवीयता के आधार पर मदद की पेशकश की जा रही है लेकिन बिना उपकरणों के यहां राहत और बचाव कार्य करना कठिन है।

गयान जिला भूकंप से काफी प्रभावित

अफगानिस्तान के पाकटिका प्रांत का गयान जिला भूकंप से काफी प्रभावित रहा। पीडि़त अपने हाथों से उन स्थानों की खोदाई कर रहे हैं, जहां कभी उन्होंने रहने के लिए अपना डेरा बसाया था। वहीं, इस सवाल पर कि आखिर तालिबान शासन बिना भारी उपकरणों के राहत की पेशकश कर रहे दुनिया के देशों से कैसे मदद लेगा। इस पर हकीमुल्ला नाम के एक पीडि़त ने कहा कि हम इस्लामिक अमीरात और पूरे देश से कहेंगे कि वे हमारी मदद करें।

टूटी सड़कें बड़ी बाधा

दरअसल, टूटी सड़कों और मलबे के ढेर के बीच राहत कार्य में काफी कठिनाइयों को सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में बुधवार को आए 6.1 तीव्रता के भूकंप से 1000 से अधिक लोगों की जान चली गई आरै डेढ़ हजार से अधिक घायल हैं। यह दो दशकों में सबसे विनाशकारी भूकंप था।

नेपाल में भी 4.1 व 4.9 तीव्रता का भूकंप

नेपाल में भी गुरुवार सुबह 4.1 व 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि यहां जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है। भूकंप का केंद्र नेपाल का कास्की जिला था।

पाक के 30 आदिवासियों ने गवांई जान

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में आए भीषण भूकंप में जान गंवाने वालों में पाकिस्तान के भी कम से कम 30 लोग शामिल हैं।

पाकिस्‍तान ने खोली सीमा

मीडिया रिपोर्ट में गुरुवार को बताया गया कि ये वे लोग थे जो 2014 के सैन्य अभियान के दौरान पाकिस्तान से सीमा पार कर अफगानिस्तान चले गए थे, और पूर्वी अफगानिस्तान के ग्रामीण पहाड़ी इलाके में रह रहे थे। मृतक पख्तूनख्वा प्रांत के उत्तरी वजीरिस्तान जिले के मदाखेल आदिवासी समुदाय के थे। डान अखबार के अनुसार पाकिस्तान ने 30 मृतकों के शव उनके मूल निवास लाने के लिए सीमा खोल दी है। 

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