आरोग्य भारती द्वारा पोषण माह के अंतर्गत स्वास्थ्य संगोष्ठी एवं स्वर्ण प्राशन कार्यक्रम का आयोजन

आरोग्य भारती प्रतापगढ़ एवं आयुष विभाग प्रतापगढ़ द्वारा के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय पोषण माह के अन्तर्गत स्वास्थ्य संगोष्ठी एवं स्वर्णप्राशन कार्यक्रम का आयोजन क्षेत्रीय ग्राम्य विकाश संस्थान अफीम कोठी सभागार में किया गया। मुख्य अतिथि सांसद प्रतापगढ़ संगम लाल गुप्ता ने दीप प्रज्वलन एवं भगवान धनवंतरि तथा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया । कार्यक्रम मे डॉ.सुधांशु उपाध्याय अध्यक्ष आरोग्य भारती प्रतापगढ़ द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया।

प्रतापगढ़(आरएनएस)

इस अवसर पर सांसद एवं मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया द्वारा  बच्चों को आयुर्वेद मे वर्णित रोग प्रतिरोधक स्वर्णप्राशन ड्राप दिया गया। इस अवसर पर सांसद ने आयुष विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करते  हुये कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वस्थ भारत का सपना तभी सफल हो सकता है जब हमारे बच्चे सुपोशित एवं निरोगी रहेंगे, इसके लिये स्वर्णप्राशन प्रभावकारी सिद्ध हो रहा है। पूरी दुनिया ने आयुर्वेद के महत्व को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि जिले में 50 बेड के आयुष चिकित्सालय के लिए  प्रयास जारी है। मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने कहा कि वेदिक इम्यूनाइजेशन स्वर्णप्राशन महर्षि काश्यप द्वारा वर्णित है जो आज भी बच्चों में  मेधा बुद्धि बढ़ाता है एवं उनमें पाचन शक्ति सुदृढ़ करता है । इसी के दृष्टिगत प्रतापगढ़ मे पिछ्ले दिनो एक साथ 3000 से अधिक बच्चों का स्वर्णप्राशन कराया गया ।
प्रयागराज के वरिष्ठ चिकित्सक, आरोग्य भारती राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय हंडिया के पूर्व प्राचार्य डॉ० जी एस तोमर ने कहा कि आरोग्य भारती का मूल उद्देश्य स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ परिवार, स्वस्थ ग्राम एवं स्वस्थ राष्ट्र है । सुपोषण इस लक्ष्य की प्राप्ति का मूल आधार है । आयुर्वेद की मान्यता के अनुसार शरीर का निर्माण आहार से होता है तथा रोग भी मिथ्या आहार विहार के परिणाम हैं । अत: हमें उचित मात्रा में ऋतु अनुकूल देश काल को ध्यान में रखते हुए हिताहार का सेवन करना चाहिए । पथ्य भोजन का सेवन करने पर औषधि सेवन की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ती वहीं पथ्य भोजन के बिना औषधि सेवन से कोई लाभ नहीं होता ।  हमें स्थानीय एवं पारम्परिक खान पान को बढ़ावा देना होगा । डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के साथ साथ पिज़्ज़ा, नूडल्स एवं बर्गर की संस्कृति से हटकर मोटे अनाज के प्रयोग को बढ़ावा देना होगा ।रागी, ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, जौ, सोयाबीन को गेहूं के साथ मिलकर मिश्रित आटे की चपाती न केवल अति पौष्टिक होती है अपितु कैल्शियम, आइरन आदि मैक्रो न्यूट्रिएंट्स से भी भरपूर होती है । इसके अलावा इसमें रेशों की मात्रा भरपूर होने से इसके प्रयोग से आँतें भी स्वस्थ रहतीं हैं जिससे विबंध (कॉन्स्टीपेसन) जैसी सामान्य समस्या से भी बचा जा सकता है । आयुर्वेद के अनुसार षडरस (मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा व कषैला) भोजन का नित्य प्रयोग बलवर्धक व एक रस सेवन दौर्बल्यकारक होता है । वस्तुतः यही आयुर्वेद सम्मत संतुलित आहार है । धन्यवाद ज्ञापन जिला सचिव डॉ भरत नायक ने किया । कार्यक्रम का संचालन आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ अवनीश पान्डेय ने किया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ सरोज शंकर राम, डॉ शशेन्द्र सिंह, डॉ ब्रह्मानंद, डॉ राजेन्द्र कुमार, डॉ विजय प्रताप सिंह, डॉ अवनीश पान्डेय, डॉ रंगनाथ शुक्ला, डॉ भरत नायक, डॉ आशीष कुमार त्रिपाठी, डॉ आकांक्षा पान्डेय, डॉ सुधांशु उपाध्याय, डॉ प्रिया त्रिपाठी,डॉ एस के शर्मा, सी एम शुक्ल एवं अनेक छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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