राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी विभागों नागरिकों को सहूलियत देने के लिए साइनेज को क्यूआर कोड युक्त करने का फैसला किया

राष्ट्रीय राजधानी के सरकारी विभागों नागरिकों को सहूलियत देने के लिए साइनेज को क्यूआर कोड युक्त करने का फैसला किया है। इस क्यूआर कोड से उस संस्थान की प्रारंभिक जानकारी मिल जाएगी और संस्थान की लोकेशन खोजने में भी काफी मदद मिलेगी।

 राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते यहां के विभागों की जिम्मेदारी नागरिकों को ज्यादा सहूलियत देने की है। इसी कड़ी में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने साइनेज को क्यूआर कोड युक्त करने का निर्णय लिया है। इस क्यूआर कोड से उस संस्थान की प्रारंभिक जानकारी मिल जाएगी, जिसका उल्लेख साइनेज पर किया गया है। हालांकि, यह पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आइटीओ के लोक निर्माण विभाग मुख्यालय समेत कुछ प्रमुख सरकारी विभागों के बाहर लगे साइनेज पर ही लगाया गया है। साइनेज में संबंधित विभाग की वेबसाइट से लेकर हेल्पलाइन नंबर और विभाग की जानकारी भी है।

पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने बताया कि विभाग ने फिलहाल कुछ जगहों पर क्यूआर कोड युक्त साइनेज लगाया है, जहां लोग मोबाइल कैमरे से क्यूआर कोड को स्कैन करने पर लिंक आ जाते हैं। इससे संबंधित विभाग की जानकारी मिल जाती है। अधिकारी ने बताया कि अगर लोगों का इसको लेकर सकारात्मक रुख रहा तो आने वाले समय में अन्य स्थानों पर इस प्रकार के साइनेज लगाए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि पीडब्ल्यूडी 1400 किलोमीटर 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों का रखरखाव का काम करता है। इन सड़कों की गति सीमा से लेकर मार्गों की जानकारी देने के लिए इमारतों के बाहर साइनेज पीडब्ल्यूडी लगाता है। नीले रंग की पट्टी पर सफेद रंग से संस्थानों की जानकारी का उल्लेख इन साइनेज में किया जाता है। इससे पहले साइनेज को लेकर पीडब्ल्यूडी ने विधायकों की तस्वीर वाला प्रयोग भी किया है। इसमें संबंधित विधानसभा क्षेत्र सीमा की जानकारी से लेकर संबंधित विधायक तक की तस्वीर भी इस साइनेज पर दिखने लगी है। इससे जनप्रतिनिधियों की ओर से साइनेज के साथ स्वयं की ओर से लगाई जाने वाली तस्वीर वाली अवैध होर्डिंग की संख्या भी कम हो गई है।

लोकेशन बताने वाला साइनेज

दिल्ली की सड़कों के सुंदरीकरण की दिशा में ऐसे साइनेज भी लगाए जा रहे हैं, जिनमें लोकेशन भी पता चल जाती है। पूर्वी दिल्ली के नरवाना रोड पर पीडब्ल्यूडी ने ऐसा साइनेज लगाया है, जिसमें क्यूआर कोड है। इस क्यूआर कोड से वहां की लोकेशन आ जाती है। इसे प्रयोग करते हुए नागरिक दूसरों को लोकेशन साझा भी कर सकते हैं। इससे गूगल ठीक उसी स्थान पर व्यक्ति को ले जाएगा जहां की वह लोकेशन है।

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