‘छात्रों को ग्रेडिंग के अंधे दौड़ से बाहर निकालिये’ डिग्री नहीं काबिलियत का है जमाना: कुलपति

 नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्रालय व एआईसीटीई के इनोवेशन सेल के इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल की 15वीं रीजन मीट सोमवार को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के इन्नोवेशन हब के सहयोग से हुई। इस दौरान 70 इनोवेटर्स व स्टार्टअप और 20 ग्रासरूट इनोवेटर्स ने अपने स्टॉल लगाये थे।

लखनऊ (आरएनएस)

 साथ ही आईआईसी का पोस्टर प्रदर्शनी भी लगायी गयी। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि चीफ इनोवेशन आॅफिसर अभय जेरे ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है। बड़ी-बड़ी कंपनियां अब स्थाई नौकरी देने की बजाय प्रोजेक्ट आधारित काम ले रही हैं। यानि जब तक युवा नवाचारी और औरों से अलग नहीं सोचेगा उसके लिए अवसर कम होते जाएंगे। कहा कि हमें बच्चों को मार्क्स और ग्रेड की अंधी दौड़ से मुक्त करते हुए कुछ नया सोचने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी। कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार मिश्र ने कहा कि नवाचार और उद्यमिता के प्रति लोगों की सोच में परिवर्तन आया है। धीरे-धीरे इसके लिए इको सिस्टम भी बन रहा है। संसाधन भी पर्याप्त हैं बस जरूरत है हमें पश्चिमी सोच से बाहर निकलने और कुछ अलग सोचने और करने की। डिग्री से ज्यादा अब काबिलियत की आवश्यकता है। इसका संचालन डॉ अनुज शर्मा ने किया जबकि धन्यवाद कुलसचिव सचिन सिंह ने दिया। इस मौके पर प्रति कुलपति प्रो. मनीष गौड़, वित्त अधिकारी जीपी सिंह, डीन इनोवेशन हब प्रो. संदीप तिवारी, उपकुलसचिव डॉ. आरके सिंह, हेड इनोवेशन हब महीप सिंह, मैनेजर वंदना शर्मा, रितेश सक्सेना सहित अन्य लोग मौजूद रहे। पूरे दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 150 संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। एकेटीयू के पीआरओ पवन कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जूरी सदस्यों ने विभिन्न स्टाल और पोस्टर को देखने के बाद विजेताओं की घोषणा की। ग्रासरूट इन्नोवेटर्स में ग्रीन्स एंड सीड मिक्सर को प्रथम पुरस्कार मिला। जबकि इन्नोवेटर्स एवं स्टार्टअप में ऐबोनिक्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रथम पुरस्कार मिला। वही पोस्टर प्रदर्शनी में पांच कंपनियों को पुरस्कृत किया गया।

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