विद्युत सुरक्षा होता सजग तो न होता लेवाना होटल  अग्निकांड ,पुलिस व प्राधिकरण के साथ विद्युत सुरक्षा भी है घटना का जिम्मेदार

 शहर की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज में होटल लेवाना और ग्रैविटी कोचिंग में भीषण अग्निकांड में जान माल के नुकसान के बाद होटलों व कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाईयों का दौर शुरु हो गया है। अब तक हुई जांच में जो बातें सामने आईं हैं, इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि दोनों जगहों पर आग शार्ट सर्किट से लगी है। दरअसल औद्योगिक इकाईयों व व्यवसायी काम्पलेक्सों में बिजली से कोई बड़ी घटनाएं न हों या कम से कम हों, इसकी जिम्मेदारी विद्युत सुरक्षा निदेशालय है। मौजूदा समय में निदेशालय के गैर जिम्मेदारी रवैये से शार्ट सर्किट की घटनाएं बढ़ी है। इसका खमियाजा शहरवासी अपनी जान गवा कर चुका रहे हैं।

लखनऊ(आरएनएस)

दरअसल किसी भी औद्योगिक इकाई व व्यवसायिक काम्पलेक्स में शार्ट सर्किट से अग्निकांड न हों, इसके लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय का गठन किया गया है। प्रत्येक औद्योगिक इकाई व व्यवसायिक काम्पलेक्स को हर 3 वर्ष के बाद इस विभाग से एनओसी लेनी पड़ती है। साथ ही सभी को बिजली संबंधित कार्यों के लिए प्रोटेक्शन टेस्ट करना होता है। इसके लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय से मान्यता प्राप्त संस्थाओं की देखरेख में रहना होता है। यह संस्थाएं हर 6 माह बाद बिजली के कार्यों का प्रोटेक्शन टेस्ट करती हैं। इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाई जाती है और हर 3 वर्ष के बाद एनओसी के समय इसको जमा करना होता है। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद यह होता है कि बिजली से कोई बड़ा हादसा न हा,े लेकिन शिथिल पड़े विद्युत सुरक्षा निदेशालय से औद्योगिक इकाईयों व व्यवसायिक काम्पलेक्सों में बिजली के उपकरणों से घटनाएं हो रही है। अब  होटल लेवाना का ही उदारहरण ले लीजिए तो वर्ष 2017 में एनओसी ली थी। इसके बाद से अभी तक होटल ने एनओसी लेने की जरुरत नहीं समझी। यही हाल गै्रविटी कोचिंग का भी है। अब ऐसे में अगर शार्ट सर्किट से आग की घटनाएं हो तो अचरज नहीं होना चाहिए। मौजूदा समय में शहर की अधिकांश औद्योगिक इकाईयों और व्यवसायिक काम्पलेक्सों का यही हाल है। मौजूदा समय में बहुत सी औद्योगिक इकाईयों और व्यवसायिक काम्पलक्सों ने विद्युत सुरक्षा निदेशालय की एनओसी के बिना ही चल रहे हैं। यह अभी भी बड़ी घटनाओं को दावत देने जैसा ही है।

फर्जी संस्थाएं शहर में कर रही हैं प्रोटेक्शन टेस्ट


दरअसल इस पूरी प्रक्रिया में बहुत हद तक जिम्मेदारी प्रोटेक्शन टेस्ट की भी है। शहर में प्रोजेक्शन टेस्ट करने वाली फर्जी संस्थाओं की भरमार है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय से बिना लाइसेंस लिए बहुत सी संस्थाएं कार्य कर रही हैं। ऐसे में जानकारी व तकनीक का आभाव होने से शार्ट सर्किट की घटनाएं हो रही हैं। इस पर विद्युत सुरक्षा की ओर से कोई लगाम नहीं लगाई जा रही है।

इलेक्ट्रिक सुपरवाइजरों पर भी होनी चाहिए कार्रवाई


प्रत्येक औद्योगिक इकाई व व्यवसायिक काॅम्पलेक्स अपने यहां इलेक्ट्रिक सुपरवाइजर नियुक्त करते हैं। समस्त बिजली के कार्यों का जिम्मा इन्हीं लोगों पर होता है। यह कार्य की अवधि में अपने संस्थान में मौजूद होते हैं। आमतौर से औद्योगिक इकाईयां या व्यवसायिक काम्पलेक्स किसी स्थानीय को इस पद पर नियुक्त कर लेते हैं। यह किसी रजिस्ट्रर्ड संस्था की मदद से दूर रहना चाहते है। इससे सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि तकनीक व ज्ञान के आभाव में कार्य चलता रहता है और शार्ट सर्किट के बाद बड़ी घटनाएं सामने आती है। इस प्रकार की घटनाओं में इलेक्ट्रिक सुपरवाइजरों पर कार्रवाई बनती है। हालांकि होना तो यह भी चाहिए कि संस्थान के मालिक के साथ इनपर पर भी प्राथमिकी दर्ज हो। इससे प्रक्रिया से सुधार की संभावनाएं बन सकती हैं।
होटल लेवाना की घटना के बाद अधिकारियों व कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि पूरे शहर में औद्योगिक इकाईयों व व्यवसायिक काम्पलेक्सों में बिजली सुरक्षा की एनओसी न लेने वालों का डेटा बेस तैयार किया जाए। इस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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