परिवहन कार्यालयों में तैनात करीब 300 कर्मियों को नहीं मिला वेतन

 कहने को तो प्रदेश भर में स्मार्ट कार्ड डीएल डिलेवरी का अत्याधुनिक सिस्टम पूरी तरह लागू हो गया है, यानी अब किसी को भी आरटीओ या फिर एआरटीओ कार्यालयों तक जाकर अपना डीएल प्राप्त करने के लिये किसी प्रकार की सिफारिश की जरूरत नहीं है। बता दें कि आवेदकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डीएल डिलेवरी से जुड़ी इस पूरी व्यवस्था को परिवहन विभाग मुख्यालय ने काफी पहले सेंट्रलाइज्ड कर दिया। 

लखनऊ (आरएनएस)

मतलब, अब सारे परमानेंट डीएल संबंधित आवेदकों के पते पर सीधे परिवहन आयुक्त कार्यालय से पोस्ट किया जायेंगे। इस सुविधा के क्रियान्वयन के लिये बकायदा विभाग की देखरेख में कंपनियों के लिये टेंडरिंग प्रक्रिया भी हुई जिसमें एक प्रमुख कंपनी का आॅनलाइन चयन हुआ। बहरहाल, कंपनी ने परिवहन आयुक्त कार्यालय से अपना डीएल डिलेवरी का काम रूटीन में तो शुरू कर दिया, लेकिन समय बीतने के साथ ही इस कंपनी के तहत प्रदेश के जिन भी परिवहन कार्यालय में उसके निजी कर्मी तैनात हैं उनके नियमित वेतन पर एक तरह से ब्रेक लगा दिया। ऐसे में जब यह प्रकरण एक अहम समीक्षा बैठक के दौरान परिवहन आयुक्त वेंकेटेश्र लू के संज्ञान में आया तो उन्होंने कार्यदायी संस्था के खिलाफ एफआईार करने के आदेश जारी कर दिये। इस आदेश के तहत संस्था की ओर अपने 300 के करीब निजी कर्मियों को वेतन भुगतान नहीं करने को एक गंभीर प्रकरण दर्शाया गया है। बताया गया कि इस कार्रवाई के लिये संबंधित क्षेत्र के परिवहन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक से मिलकर आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे। गौर हो कि बीते समय परिवहन विभाग के साथ उक्त कार्यदायी संस्था के बीच कुछ जरूरी शर्तें निर्धारित हुई थी, जिसके आधार पर संस्था को कार्य करना था। इसके तहत संस्था ने शर्तों का उल्लंघन करते हुए विभाग में अभी तक जो काम नहीं किया, उसमें विभाग को हार्डवेयर इंस्टालेशन नहीं करना, निजी कर्मियों का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं कराना, डीएल की डिलेवरी में देरी होने की समीक्षा नहीं करना और डीएल संबंधी शिकायतों के प्रति लापरवाही बरतना शामिल है। बहरहाल, विभागीय समीक्षा के तहत परिवहन आयुक्त के निर्देश पर सभी अहम बिंदुओं पर अपर परिवहन आयुक्त आईटी निर्मल प्रसाद ने त्वरित संज्ञान ले लिया है और आगे की कार्रवाई पर कार्य करना शुरू कर दिया है। 

राष्ट्रीय न्यूज़

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