2020 की ऐसी पांच अंतरराष्ट्रीय घटनाएं जिन्होंने रच दिया इतिहास

साल 2020 कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाएं हुई हैं जिसका असर आगामी दिनों में देखने को मिलेगा। तो आइए जानते हैं विश्व की ऐसी पांच बड़ी राजनीतिक-आर्थिक घटनाएं जो वर्ष 2020 में मील का पत्थर साबित हुई।  

अमेरिका-तालिबान समझौता

जिस समय डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों और इजरायल के बीच शांति की बुनियाद रख रहे थे उसी दौर में एक और बड़ा काम अफगान और तालिबान के बीच बातचीत को लेकर भी हो रहा था। आखिरकार 12 सितम्बर को कतर की राजधानी दोहा में अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान नेताओं के बीच ऐतिहासिक वार्ता शुरू हुई। इस वार्ता को महत्वपूर्ण बनाने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दुनिया के प्रमुख देशों को भी इसमें शामिल किया था जिसमें भारत भी शामिल था। अमेरिका लंबे समय से अफगानिस्तान से निकलना चाह रहा है। इसके लिए अफगानिस्तान में शांति स्थापित होनी जरूरी थी और यह तालिबान और अफगान सरकार में बातचीत के बिना संभव नहीं था। तमाम कोशिश के बावजूद तालिबान को खत्म नहीं किया जा सका था और अब बातचीत ही जरिया बचा था। अफ़ग़ानिस्तान से अमेरीकी सैनिकों को वापस लाना ट्रंप के साल 2016 के चुनावी वादों में शामिल था। ट्रंप के पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन में भी ये कोशिशें हुई थीं लेकिन सफलता नहीं मिली। 
बता दें कि अफ़ग़ानिस्तान और अमेरिका को इस युद्ध में बड़ी मानवीय क़ीमत भी चुकानी पड़ी है। एक अनुमान के अनुसार इस युद्ध में अब तक 157000 से अधिक लोग मारे गए हैं जिनमें 43 हज़ार से अधिक आम नागरिक हैं। जबकि लाखों अफ़ग़ान नागरिक शरणार्थी भी बन गए हैं। इसके लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को भी भारी क़ीमत चुकानी पड़ी है।  अमेरिका के 2400 से अधिक सैनिक मारे गए जबकि नेटो सहयोगियों के 1100 से अधिक सैनिकों ने अफ़ग़ानिस्तान में जान गंवाई है। अनुमान के मुताबिक अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान युद्ध पर दो अरब डॉलर से अधिक ख़र्च किए हैं।

इसराइल-बहरीन के रिश्ते 
जुलाई में चार दिन चली बैठक के बाद यूरोपीय संघ के देश कोरोना संकट से निपटने के लिए 860000 मिलियन डॉलर का फंड बनाने पर सहमति जताई है। ये उन सदस्य देशों की मदद के लिए है जिन दोशों पर कोरोना संकट गंभीर रूप से फैला है। यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों ने 45 करोड़ लोगों को कोरोना जैसी खतरनाक महामारी से छुटकरा दिलाने के लिए टीकाकरण के अभियान की शुरुआत की। यूरोपीय संघ के 27 देशों में मेडिकल कर्मियों, नर्सिंग होम के कर्मियों और बड़े नेताओं को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगाया गया और लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि यह कोरोना महामारी का यह टीकाकरण बिल्कुल सुरक्षित है और यह टीका कोरोना महामारी से निजात दिलाने के लिए बहुत बड़ी संभावना की ओर ले जाएगा। यूरोपीय संघ की इस पहल से माना जा रहा है कि ये रिकवरी फंड यूरोपीय संघ के भीतर और अधिक सहयोग प्रदान करेगा।


दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता
हाल ही में 10 आसियान देशों समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देशों ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस निर्णय के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बन गया है। इस समझौते को मील का पत्थर का करार दिया जा रहा है। विभिन्न अध्ययन बताते हैं कि यह समझौता चीन के लिये आर्थिक प्रभाव से अधिक रणनीतिक महत्व का है। इस समझौते को विश्व का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता कहा जा रहा है। 10 आसियान देशों समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 15 देशों ने इसपर हस्ताक्षर किए हैं। भारत इस समझौते में शामिल नहीं हुआ है। भारत कुछ शर्तों से सहमत नहीं होने के चलते पिछले साल अररसीईपी की बातचीत से बाहर हो गया था। आरसीईपी का उद्देश्य इस समझौते में शामिल प्रत्येक देश के उत्पादों और सेवाओं को एक-दूसरे देशों के लिए इसे आसान बनाना है। 10 आसियान (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, लाओस तथा वियतनाम) और 6 अन्य देशों (चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड) ने नवंबर, 2012 में नोम पेह में 21वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान आरसीईपी वार्ताओं की शुरुआत की थी।

ब्रेग्जिट ने 1973 में बनी साझेदारी तोड़ी

यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों ने ब्रिटेन के साथ ब्रेक्जिट- बाद व्यापार समझौते को सर्वसम्मति से मंजूरी देने की वजह से भी 2020 को याद किया जाएगा। पांच दशक तक यूरोपीय संघ का हिस्सा बने रहने के बाद ब्रिटेन अब आजादी की एक नई राह पर होगा। पांच दशक के निकट आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समन्वय के बाद अब ब्रिटेन सारे फैसले अकेले ले सकेगा। इससे पहले जून 2016 में हुए जनमत संग्रह में यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले को अंजाम तक पहुंचाते हुए ब्रिटेन की सरकार ने ब्रेग्जिट को मंज़ूरी दे दी थी। ब्रेग्जिट ने 1973 में बनी साझेदारी को तोड़ दिया। अब ब्रिटेन यूरोपीय संघ के व्यापार नियमों के दायरे से औपचारिक रूप से बाहर हो जाएगा।

यूरोपीय संघ की अहम पहल 

जुलाई में चार दिन चली बैठक के बाद यूरोपीय संघ के देश कोरोना संकट से निपटने के लिए 860000 मिलियन डॉलर का फंड बनाने पर सहमति जताई है। ये उन सदस्य देशों की मदद के लिए है जिन दोशों पर कोरोना संकट गंभीर रूप से फैला है। यूरोपीय संघ (ईयू) के देशों ने 45 करोड़ लोगों को कोरोना जैसी खतरनाक महामारी से छुटकरा दिलाने के लिए टीकाकरण के अभियान की शुरुआत की। यूरोपीय संघ के 27 देशों में मेडिकल कर्मियों, नर्सिंग होम के कर्मियों और बड़े नेताओं को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए टीका लगाया गया और लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि यह कोरोना महामारी का यह टीकाकरण बिल्कुल सुरक्षित है और यह टीका कोरोना महामारी से निजात दिलाने के लिए बहुत बड़ी संभावना की ओर ले जाएगा।
यूरोपीय संघ की इस पहल से माना जा रहा है कि ये रिकवरी फंड यूरोपीय संघ के भीतर और अधिक सहयोग प्रदान करेगा।

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