हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की दूसरी सूची में प्रदेश के इंदौर और जबलपुर हवाई अड्डों का नाम भी हुआ शामिल

हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की दूसरी सूची में प्रदेश के इंदौर और जबलपुर हवाई अड्डों का नाम भी शामिल हो गया है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने गुरुवार को इसकी अनुमति दे दी है। अब निजीकरण के बिड दस्तावेज तैयार करने के लिए एक सलाहकार की नियुक्ति होगी, जिसके बाद अगले एक साल में इन्हें निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। दरअसल जबलपुर हवाई अड्डे से सरकार को अपेक्षाकृत कम कमाई हो रही है इसलिए इसे निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया गया है।

421 करोड़ से हो रहा विस्तारीकरण : डुमना हवाई अड्डे का फिलहाल विस्तारीकरण कार्य चल रहा है। 421 करोड़ से होने वाले इस विस्तारीकरण में रनवे और मुख्य भवन का विस्तार, एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) टावर सहित अन्य कार्य हो रहे हैं। इन कामों को जून 2021 तक पूरा किया जाना था लेकिन कोविड-19 संक्रमण काल में लगे लाकडाउन के कारण ये काम अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। अगले एक साल में इनके भी पूरे होने की उम्मीद है।

इन हवाई अड्डों का होना है निजीकरण : भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने जिन हवाई अड्डों का निजीकरण करने की अनुमति दी है उनमें छह प्रमुख हवाई अड्डे अमृतसर, भुवनेश्वर, इंदौर, रायपुर, त्रिची और वाराणसी का नाम है। वहीं सात छोटे हवाई अड्डे हुबली, तिरुपति, औरंगाबाद, जबलपुर, कांगड़ा, कुशीनगर का नाम शामिल है।

फरवरी 2019 में हुई शुरूआत : देश के हवाई अड्डों के निजीकरण की शुरूआत फरवरी 2019 में हुई थी। केंद्र सरकार ने सबसे पहले देश के छह प्रमुख हवाई अड्डों लखनऊ, अहमदाबाद, मंगलुरु, जयपुर, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी का निजीकरण किया था। इन हवाई अड्डों को 50 साल तक चलाने के लिए अदानी ग्रुप को दिया गया था।

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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने जबलपुर एयरपोर्ट को निजी हाथों में सौंपने की अनुमति दे दी है। जबलपुर के साथ इंदौर एयरपोर्ट का नाम भी इसमें शामिल है।

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