सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु कैसे हुई?

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु कैसे हुई? गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के षड़यंत्र से या मुंबई के पॉलिटिकल और बॉलीवुडिया हाईप्रोफाइल नेक्सस के रहस्यमयी फंदे में फंसने से? या फिर ये एक साधारण सुसाइड केस भर है। परिवार का शक़, उनके आरोप सही हैं या रिया और मुंबई पुलिस के दावे। इन सवालों के जवाब अभी इतनी जल्दी मिलते नहीं दिख रहे हैं, कम से कम बिहार चुनाव तक तो नहीं मिल रहे। अगर ये एक साधारण सुसाइड केस है तो इन बातों से हटकर इस मौत का एक आंकलन और हो सकता है। ये आंकलन हो सकता है कुछ लोगों को समझ ना आए, लेकिन कई लोग इसे समझ भी सकते हैं।

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एक ऐसा इंसान जो 56 साल पहले दुनिया छोड़ गया

संतुष्टि, ख्वाहिशें, उम्मीदें ये कुछ ऐसे शब्द हैं जिनकी फेहरिस्त जितनी लंबी होती है ज़िंदगी में उलझनें उतनी ही बढ़ती जाती हैं। खुद की खुद ही से कभी ना खत्म होने वाली प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाती है। ऐसा उसी शख्स के साथ होता है जो अपने प्रोफेशन की हर विधा में माहिर हो, जो संपूर्ण हो। मैं ऐसा इसलिए सोचता हूं और मानता भी हूं क्योंकि सुशांत सिंह राजपूत का जाना ऐसी ही बातों से ताल्लुक रखता है। इसके लिए मैं आपको एक ऐसे इंसान की जानकारी देता हूं जो सुशांत की मौत से 56 साल पहले दुनिया छोड़ गया। वो कोई और नहीं महान फिल्मकार गुरुदत्त थे।

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डांसर, एक्टर, राइटर, डायरेक्टर-प्रोड्यूसर, कोरियोग्राफर, सिनेमा की हर छोटी-बड़ी चीज़ की तकनीकी समझ, हर बात में पारंगत थे गुरु। ये गुण उस वक्त किसी एक शख्स में होना पागलपान की ही निशानी थे। शुरूआत में लोग समझते रहे गुरु बंगाली दत्त हैं। लेकिन सच ये था कि वो मैंगलोर के सारस्वत ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते थे। गुरु ने महान उदयशंकर के ग्रुप में कई साल अल्मोड़ा में नृत्य के प्रति अपने ज्ञान को बढ़ाया। प्यासा, कागज़ के फूल, साहब बीवी और गुलाम, चौदहवीं का चांद जैसी फिल्में बनाईं। गुरुदत्त के भाई आत्माराम के मुताबिक वो पचास के दशक में 3 से 5 लाख तक रुपए एक फिल्म का मेहनताना लेते थे। ऐसे हरफनमौला इंसान ने 9 अक्टूबर 1964 की रात शराब के साथ ‘’सोनारिल्ड’’ नाम की नींद की कई गोलियां एक साथ खाली और फिर कभी नहीं उठे।

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गुरूदत्त की मौत जल्द होनी निश्चित थी?

10 अक्टूबर की सुबह साढ़े 10 बजे तक जब दरवाज़ा नहीं खुला तो बीवी गीता दत्त के फोन करने के बाद नौकर ने दरवाज़ा तोड़ा तो उनका खामोश शरीर बिस्तर पर पड़ा था। पूरी फिल्म इंडस्ट्री परेशान थी, हैरान थी कि 39 साल की उम्र में गुरुदत्त ने क्यों सुसाइड कर लिया। किसी ने कहा पत्नी गीता दत्त के घर छोड़कर उनसे दूर होने की ज़िद, किसी ने कहा वहीदा रहमान की बेवफाई, तो किसी ने कहा गुरु का सनकी व्यवहार ही उनकी मौत की वजह बना। लेकिन ये सच था उनकी मौत जल्द होनी निश्चित थी। एक इंटरव्यू में खुद वहीदा रहमान ने कहा था कि ‘’गुरुदत्त को कोई बचा ही नहीं सकता था, क्योंकि ऊपरवाले ने गुरु को सबकुछ दिया था सिवाय संतुष्टि के। कुछ लोग कभी भी संतुष्ट नहीं रह सकते, जो चीज़ उन्हें जिंदगी नहीं दे पाती, उसकी तलाश उन्हें मौत से मिलती है। वहीदा ने गुरु से कहा था एक ज़िंदगी में सबकुछ नहीं मिल सकता।‘’

9 अक्टूबर की वो मनहूश शाम!

मशहूर राइटर-डायरेक्टर अबरार अल्वी गुरुदत्त के साथ उनके घर पर ही थे, वो फिल्म ‘’बहारें फिर भी आएंगी’’ का अंतिम सीन लिख रहे थे। शराब का खुमार भी चरम पर था। कुछ देर बाद गुरु अल्वी को छोड़कर अपने कमरे में चले गए। दो तीन घंटे बाद अल्वी भी सीन खत्म करके घर चले गए। सुबह तीन बजे गुरु दत्त फिर लौटकर आए नौकर रतन से शराब की पूरी बोतल लेकर वापस अपने कमरे में चले गए, और फिर कभी नहीं लौटे। कैफी आज़मी ने उनके जाने के बाद लिखा ‘’रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई, तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई’’

सुशांत की ख्वाहिशें गुरूदत्त जैसी थी?

सुशांत की ज़िंदगी का चैप्टर भी काफी कुछ गुरु की तरह ही खत्म हुआ, अचानक, अनायास। बहन के कॉल करने के बाद सुशांत के कमरे के दरवाज़े को भी ऐसे ही तोड़ा गया, और शव बाहर निकाला गया। मैंने सुशांत की सोशल साइट्स पर जाकर देखा है, संतुष्टि उनमें भी काम के प्रति गुरुदत्त की भांति ही नहीं थी। श्यामक दावर के ट्रूप में डांस करने वाला डांसर, टीवी सीरियल में बड़ी पहचान बनाने वाला अभिनेता, फिल्मी पर्दे पर बिना गॉडफादर के छाप छोड़ने वाला सितारा था सुशांत।

इस सबके बावजूद आप सुशांत के ट्वीटर अकाउंट पर जाएंगे तो पाएंगे पचास ख्वाहिशों की पूरी लिस्ट सुशांत ने हाथ से लिखकर पोस्ट की थी, जिसे वो पूरी करना चाहता था। एक लड़की अंकिता लोखंडे के साथ सुशांत की अधूरी प्रेम कहानी। शादी की तारीख निकलने के बाद भी दोनों शादी नहीं कर पाए, फिर भी सात साल रिश्ते में रहे। गुरुदत्त ने गीता से शादी कर ली थी, बच्चे भी थे, लेकिन वहीदा के ज़िंदगी में आने से दोनों में दूरियां बढ़ गईं।

क्या सुशांत की अपेक्षाएं उनपर हावी हो गई थी?

गुरु की हमसफर तो वहीदा भी नहीं बन सकी, लेकिन सुशांत की लाइफ में रिया चक्रवर्ती एकाधिकार जमाती चली गई और फिर उसे कभी बाहर नहीं निकलने दिया। जितने भी लोगों ने सुशांत के सुसाइड के बाद इंटरव्यू दिए हैं हर किसी ने कहा है सुशांत सुसाइड नहीं कर सकता।

अंकिता लोखंडे अपने इंटरव्यू में कहती हैं सुशांत को ब्रेन नहीं कंट्रोल करता था, वो ब्रेन को कंट्रोल करता था। अंकिता बताती हैं सुशांत की ज़िंदगी में भी हर साल के लिए अलग-अलग प्लान होते थे, जिन्हें वो पूरा भी करता था। एक वक्त में एक काम करते-करते बहुत आगे की सोच लेता था। चांद-तारे, डांस, एक्टिंग, खेत-खलिहान, कैलाश पर्वत पर जाकर मेडिटेशन, वैदिक एस्ट्रोलॉजी का ज्ञान और भी पता नहीं क्या-क्या 34 साल का लड़का करने का प्लान बना रहा था। इस सबके बावजूद उलझा हुआ था एक अनकहे डिप्रेशन में, जो किसी और का गढ़ा झूठा संसार था।

तो फिर सुशांत की मृत्यु का कारण क्या रहा होगा? 

सुशांत की मृत्यु का एक कारण नहीं है, कई कारण हो सकते हैं। इन सबके बावजूद ये भी सच है कि इस ख्वाहिश पसंद दुनिया का क्रिएटर खुद सुशांत था। एक लड़की के मोहपाश में फंसने का गुनहगार खुद सुशांत ही था। एक लड़की के हाथ में अपने सर्वस्व की डोर थमा देना का कसूरवार सुशांत ही था।

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