सीएम मनोहर लाल की बड़ी सफलता, 1.27 लाख हेक्टेयर में धान की जगह दूसरी फसल उगाने के लिए किसान हुए राजी

Farmers Scheme- प्रकृति के लिए पानी बचाने और सुरक्षा का बहुत अच्छा काम करने वाले किसानों को हरियाणा सरकार देगी तोहफा। 74,446 किसानों को मुफ्त में मिलेगा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का लाभ।

पानी के अत्यधिक उपयोग से जल संकट (Water crisis) गहरा होता जा रहा है, माना जा रहा है कि तीसरे विश्व युद्ध कि स्थिति बनी तो वजह होगी पानी। लेकिन ज्यादातर सरकारें इससे निपटने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना रही हैं, अगर योजना बना भी लिया तो जमीनी स्तर पर नहीं उतर पाती है, फाइलों में ही सिमट के रह जाती है। मगर हरियाणा सरकार ने इस मामले में एक aनया रिकॉर्ड बना लिया है। यह देश का पहला ऐसा राज्य बना है जहां सरकार ने किसानों को 1,26,927 हैक्टेयर में धान की जगह दूसरी फसल को उगाने के लिए मना लिया है। इसका बकायदा सरकारी पोर्टल पर आवेदन हो गया है। वेरिफिकेशन जारी हो गया है। इनमें से 74,446 किसानों को हरियाणा सरकार ने मुफ्त फसल बीमा योजना (PMFBY) का फायदा पहुंचाया है।

यह सब संभव हुआ है ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना (Mera Pani Meri Virasat Scheme) के अंतर्गत। इसके अनुसार मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने एक लाख हेक्टेयर जमीन में धान के बदले किसानों को दूसरी फसलों को उगाने के लिए लक्ष्य रखा था। हालांकि, भावी पीढ़ी के लिए जल संकट के दुष्परिणाम को देखते हुए लक्ष्य से कहीं अधिक किसान तैयार हो गए है। क्योंकि सरकार ऐसा करने वालों को 7000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि रूप में दे रही है। जिसमें धान की जगह मक्का, बाजरा और दलहन की सरकारी यानी एमएसपी (MSP-Minimum support price) पर खरीद की गारंटी दी है।

किसानों के हिस्से का भी दिया पैसा

जिन किसानों ने इस योजना के अंतर्गत पोर्टल पर आवेदन किया है उनकी जमीन का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। कृषि विभाग ने 97,500 एकड़ वेरिफाई कर लिया है। इसके मालिकों को अब तक 9 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है। जबकि 80,640 एकड़ जमीन के फसल बीमा का प्रीमियम सरकार भरेगी. किसानों के हिस्सा के तौर पर हरियाणा सरकार ने 15.32 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया है।

भाजपा प्रवक्ता राजीव जेटली का कहना है कि यह मुख्यमंत्री मनोहर लाल की नीति का परिणाम है कि जल संकट से उबारने के लिए उन्होंने किसानों को मनाया है। एक लाख की जगह किसानों ने सवा लाख हेक्टेयर में धान की फसल छोड़ दी है। इस योजना के जरिए जल संकट का सामना कर रहे सभी प्रदेशों को यह समझने की जरूरत है कि कैसे ज्यादा पानी वाली फसलें कम की जाएं और किसानों का घाटा भी न हो।

हरियाणा धान का उत्पादन करने वाले टॉप टेन कि सूची में शामिल है। यहां धान की खूब सरकारी खरीद होती है। इसलिए किसानों के लिए धान की खेती घाटे का सौदा नहीं है। लेकिन फिर भी पानी के लिहाज से बेहतर कल के लिए आज किसानों ने इस फसल को छोड़ने का फैसला किया है।

हरियाणा और उसका जल संकट

हरियाणा का कुछ हिस्सा पानी के लिहाज से डार्क जोन हो चुका है मतलब भू-जल स्तर में भारी गिरावट हो गयी है। जिसमें 36 ब्लॉक ऐसे हैं, जहां पिछले 12 सालों में भू-जल स्तर (Ground water level) में गिरावट दोगनी हुई है। जहां पहले पानी की गहराई 20 मीटर थी, वो आज 40 मीटर हो गई है। ऐसे 19 ब्लॉक हैं। लेकिन इनमें से 11 ऐसे हैं जिसमें धान की फसल नहीं होती। जबकि 8 ब्लॉकों रतिया, सीवान, गुहला, पीपली, शाहबाद, बबैन, ईस्माइलाबाद व सिरसा में वाटर लेवल 40 मीटर से ज्यादा है। इनमें धान की बिजाई होती है। इनमें यह स्कीम लागू की गई है।

किसानों से क्यों है इतनी उम्मीद?

यूनाइटेड नेशंस के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुताबिक भारत में 90% पानी का प्रयोग कृषि क्षेत्र में होता है। पानी की ज्यादातर खपत धान और गन्ने जैसी फसलों में होती है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक एक KG चावल पैदा करने में 5000 लीटर तक पानी की जरूरत होती है। जबकि गन्ने की फसल में इससे भी अधिक पानी खर्च होता है। नीति आयोग (NITI Aayog) ने भी गन्ना और धान की फसल पर चिंता जाहिर करते हुए पिछले साल कहा था कि इनकी खेती के माध्यम से पानी की बर्बादी हो रही है। इसलिए सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा किसान फसल विविधीकरण (Crop diversification) को अपनाएं।

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