मायावती ने अपनी प्रेस कांफेंस मे समाजवादी पार्टी के मुखिया पर साधा सीधा निशाना॥

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बीएसपी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद सुश्री मायावती जी ने आज मीडिया संबोधन में अपनी बात रखी उसके मुख्य अंश निम्नानुसार हैं-

“उत्तर प्रदेश में इस बार राज्यसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी सपा की घिनौनी बीएसपी विरोधी राजनीति  ही नहीं बल्कि इनका घोर दलित विरोधी चेहरा भी खुलकर प्रदेश व देश की जनता के सामने आ गया है जो कि वास्तव में इनका असली चाल चरित्र व चेहरा भी है। सपा द्वारा राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार खड़ा करने के उपरांत ही फिर बीएसपी अपना प्रत्याशी केवल इसलिए उतारा था ताकि कोई धन्ना सेठ हमारे भी विधायकों की खरीद फरोख्त करके या चुनाव जीत ना जाए लेकिन सपा ने एक बार फिर वही दगाबाजी की जो वे व उनके पिता श्री पहले भी बीएसपी के विरूद्ध करते चले आए हैं। अति दुखद॥ लोकसभा आम चुनाव में भी सपा गठबंधन के प्रति ईमानदार नहीं रही वह केवल 2 जून 1995 की गेस्ट हाउस कांड केस वापसी पर ही जोर देती रही पार्टी का दोनों ही फैसला बाद में पूरा सही साबित नहीं हुआ लेकिन बीएसपी कल की घटना का जैसे को तैसा जवाब देने के लिए एमएलसी के होने वाले आगामी चुनाव में सपा को दूसरे खड़े किए जाने वाले उम्मीदवार को हराने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देगी अर्थात सपा के दूसरे उम्मीदवार को अब हमारी पार्टी जरूर एम0एल0सी0 का चुनाव हराएगी साथ ही बीएसपी के साथ विधायकों ने सपा समर्थित निर्दलीय के रूप में खड़े किए गए उद्योगपति को उनके धन व सपा के टिकट के लालच में आकर अपनी मूल पार्टी बीएसपी से विश्वासघात किया उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण आज तत्काल प्रभाव से ही पार्टी से निलंबित कर दिया गया है तथा यह विधायक जिस भी जाति समाज व धर्म के हैं तो उनकी जाति समाज व धर्म के लोगों को ही अधिकतर उनके विरुद्ध चुनाव में उतारा जाएगा अर्थात उनके समाज को उनके किए की सजा नहीं दी जाएगी॥

श्री सतीश चंद्र मिश्र वरिष्ठ नेता व सांसद हैं सपा मुखिया द्वारा उनको नजरअंदाज करना व उनसे फोन पर बात तक नहीं करना केवल मिश्रा जी का अपमान नहीं है बल्कि यह समूचे ब्राह्मण समाज का अपमान है जिसका संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज जरूर सपा को उसकी सजा देगा साथ ही जोड़-तोड़ की राजनीति टिकाऊ नहीं होती है क्या सपा वाले आछी दलित विरोधी राजनीति करके श्री राम मनोहर लोहिया के आदर्शों पर चल रहे हैं इस पर जरूर गंभीरता से सोच विचार कर लें तो बेहतर है॥ वैसे भी यूपी में सपा के शासनकाल में भीषण दंगे हुए व कानून व्यवस्था की हालत सबसे ज्यादा खराब रही थी इसलिए खासकर कानून व्यवस्था के मामले में वर्तमान बीजेपी सरकार पर उंगली उठाने का सपा को कोई हक नहीं है वास्तव में यह हक बीएसपी को ही है जिनकी सरकार में कानून का राज कायम था।

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