महिलाएं सैनेटरी पैड्स खरीदते समय इन विशेष बातों का रखें ध्यान….

बदलते वक्त के साथ महिलाओं ने भी अपनी सेहत और रहन-सहन के तरीके में कई तरह के बदलाव महसूस किए। महिलाओं के बीच सेहत से जुड़ा सबसे बड़ा बदलाव पीरियड्स के दौरान इस्तेमाल होने वाले कपड़े की जगह सेनेटरी पैड्स को जगह देना था। पीरियड्स को ‘मासिक धर्म’, ‘माहवारी’, ‘ब्लीडिंग’, ‘मेन्स्ट्रूऐशन’ जैसे नामो से भी जाना जाता है। यह एक नेचुरल प्रोसेस है। पीरियड्स का शुरू होना एक संकेत होता है कि ‘महिला का शरीर गर्भधारण करने को तैयार है’। ‘पीरियड्स’ के दौरान महिला के गर्भाशय से योनि के माध्यम से रक्त का स्राव या ब्लीडिंग होती है। और यह ‘ब्लीडिंग’ हर महीने 2 से 5 दिन या 2 से 7 तक चलती है। दो पीरियड के बीच के समय को ‘मासिक धर्म चक्र’ या ‘मेन्स्ट्रूऐशन साइकिल’ कहा जाता है। यह मासिक धर्म चक्र 28 से 35 दिन का हो सकता है। सामान्य तौर पर मासिक चक्र 28 दिन का होता है।



पीरियड्स में होने वाली ब्लीडिंग को रोकने के लिए लड़कियां सेनेटरी पैड्स का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि सैनिटरी पैड खरीदना ही खुद के स्वास्थ्य की देखभाल करना नहीं होता है। इसे खरीदते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है। आइए जानते हैं क्या हैं वो बातें…

सैनेटरी पैड्स खरीदते समय इन विशेष बातों का रखें ध्यान

हाइजीन


सैनेटरी पैड्स के इस्तेमाल से जुड़े सभी नियमों का पालन करें। पीरियड्स के दौरान हर 4-6 घंटों के बीच सैनेटरी पैड्स बदलें। आप जिस पैड का इस्तेमाल कर रही हैं उसकी क्वालिटी जरुर चेक कर ले। क्या इसका इस्तेमाल करना आपके लिए पूरी तरह से हाइजिनिक होगा या नहीं। दूसरा, कुछ महिलाएं एक ही पैड को लंबे समय तक इस्तेमाल करती हैं। ये खतरनाक हो सकता है, क्योंकि कुछ पैड्स सिर्फ वन टाइम यूज के लिए बनाए जाते हैं अगर आप उसे लंबे समय तक इस्तेमाल करती हैं तो बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

कम पैसों का लालच

सैनेटरी पैड्स खरीदते समय सबसे पहले उसकी क्वालिटी का जरूर ध्यान दें। कई बार महिलाएं कम पैसों का लालच हलकी क्वालिटी वाला सैनेटरी पैड्स खरीद लेती है जो आगे चलकर उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं, ऐसा बिलकुल भी ना करें। पैड खरीदते समय ध्यान रखें कि नैपकिन कॉर्न स्टार्च और बैंबू फाइबर से बने हुए हों।

खूशबू से बचें

ग्राहकों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए कई कंपनी खूशबू वाले पैड्स भी निकाल रहे है। लेकिन ध्यान रखें खूशबू वाले सैनेटरी पैड खरीदने से बचना चाहिए। इनमें ऐसे रसायन हो सकते हैं, जो बाद में आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते है। इसलिए हमेशा सुगंध रहित पैड ही खरीदें। अगर आप कम समय में ही पैड बदल लेती हैं तो आप बदबू की स्थिति से भी बची रहेंगी। पैड का उपयोग करने से जननांग कैंसर हो सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि एक समय में पैड का उपयोग करने से आपको कैंसर का खतरा होगा, लेकिन जो लोग हर महीने इनका उपयोग कर रहे हैं उन्हें अलर्ट होने की आवश्यकता है। यह मुख्य रूप से उन पैड्स के साथ होता है जिनमें रसायन होते हैं। यह आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

पर्यावरण पर असर

सेनेटरी पैड्स खरीदते समय हमेशा ऐसे पैड का चुनाव करें जिन्हें आसानी से डिस्पोज या नष्ट किया जा सकता है। जो सेनेटरी पैड आसानी से डिस्पोज नहीं हो पाते वह हमारे साथ-साथ वातावरण को भी नुकसान पहुंचाते हैं। सिंथेटिक पैड्स को बिलकुल भी नहीं खरीदें। इसकी जगह बायोड्रिग्रेडेबल पैड्स का यूज़ करें। यह आपके साथ-साथ वातावरण के लिए भी सेफ हैं।

साइज का रखें विशेष ध्यान

सबसे जरुरी बात है साइज का ध्यान रखना। अक्सर महिलाएं पैड खरीदते समय साइज का ध्यान नहीं रखती है। साइज के सही नहीं होने पर फिटिंग की समस्या हो सकती है। ध्यान रखें, पहली बार पीरियड्स आने पर आप रेगुलर साइज के नैपकिन या टैम्पून का इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर रेगुलर नैपकिन जल्दी भर जाता है, तो एक लंबा पैड इस्तेमाल करें। अगर कुछ घंटों बाद आपको ऐसा लगता है कि नैपकिन पर ज्यादा ब्लड नहीं है, तो आप एक रेगुलर साइज के पैड या टैम्पून का इस्तेमाल भी कर सकती हैं।

समय का भी रखें ध्यान

कई बार रात के समय रेगुलर पैड यूज करने से लड़कियों की नींद खराब हो जाती है। ऐसे में कोशिश करें कि पैड के डिफरेंट टाइप को समझ कर उसका इस्तेमाल अलग-अलग समय के अनुसार करें। नाइट पैड पीछे की तरफ से ज्यादा लंबे और चौड़े होते हैं, ताकि सोते समय इनके हिलने डुलने की संभावना कम रहे और ये आपको पूरी तरह से सुरक्षा दें सके।

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