बढ़ते कोरोना संक्रमण के दौर में रोजे या व्रत रखते समय गर्भवती महिलाएं इन बातों का जरूर ध्यान रखें!

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रमज़ान का महीना चल रहा है। ऐसे में हर कोई अपने रब को राज़ी करने में लगा हुआ है। मुस्लिम समुदाय के लोग रोज़ा ,नमाज़ , इबादत में लगे हुए हैं ताकि ईश्वर की कृपा दृष्टि उन पर बनी रहे। बच्चे हों या युवा हों या फ़िर बुज़ुर्ग, धार्मिक कार्यों में हर कोई रुचि रखता है। ये उनकी ईश्वर भक्ति कहलाती है। नव रात्रि हो या रमज़ान, दोनों समुदाय के लोग व्रत या रोज़ा रखते हैं। ऐसे में जो महिलाएं प्रेग्नेंट हैं, यदि वो व्रत या रोज़ा रखने जा रही हैं। तो उन्हें काफ़ी ध्यान रखने की ज़रूरत है।  तो आज हम प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देंगे। जो फ़ास्ट रखने से पहले उनके लिए जानना आवश्यक है।

1- प्रेग्नेंसी के दौरान एक महिला के लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी होता है पौष्टिक आहार(Nourishment) जोकि एक बच्चे के लिए भी आवश्यक होता है। अगर महिला को पौष्टिक आहार नहीं मिलता है तो उसका इम्यून सिस्टम कमज़ोर होने लगता है जोकि उसके बच्चे के लिए भी ख़तरनाक साबित हो सकता है। 

2- प्रत्येक प्रेग्नेंट महिला को Nutritious Food में फ्रेश जूस, कम चीनी के साथ पानी और नींबू से बनी हुई शिकंजी(Lemonade),ड्राय फ्रूट्स (Nuts),मखाना (Fox Nut), दूध, दही, पनीर, मिल्क शेक, फ्रूट्स और मिल्क से बनी हुई स्मूदी, फ्रूट कस्टर्ड, छाछ,लस्सी, हरी सब्ज़ियां, मौसमी फल, नींबू, आंवला, अंजीर, गुड़ (Jaggery), मूंगफली, घी और तेल नियंत्रित, आलू के साथ हरी सब्जियां, खाने में सेंधा नमक(Rock Salt), फ्रूट्स के साथ काला नमक का प्रयोग करना चाहिए। ज़्यादा पानी पीना चाहिए ताकि dehydration ना हो। सेंधा नमक हाई ब्लड प्रेशर में लाभदायक है। जिन महिलाओं का ब्लड शुगर लेवल हाई रहता है उन्हें केला और आम का प्रयोग कम करना चाहिए।गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। नट्स में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट व प्रोटीन पाए जाते हैं। इसके अलावा पनीर में भी कैल्शियम और प्रोटीन पाए जाते हैं। जो प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए अत्यंत लाभदायक होते हैं। 
व्रत में सिंघाड़े का आंटा ज़्यादा दिन का रखा हुआ बिल्कुल प्रयोग ना करें क्योंकि इसमें कुछ अल्कोलाइड्स बनने लगते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

3- प्रेग्नेंसी महिलाओं के सभी organs पर पूरा लोड डालती है क्योंकि इसमें महिलाओं का वज़न बढ़ जाता है जिससे किडनी,हार्ट,माइंड सभी पर असर होता है। ऐसे में महिलाओं का मूड स्विंग होता है। साथ ही कभी-कभी डिप्रेशन और एंजायटी हो जाती है। ऐसे में उन्हें फ़ैमिली के सपोर्ट और काउंसलिंग की आवश्यकता होती है। उन्हें पूर्ण 8-10 घंटे आराम करना चाहिए। मेडिसिन भी समय से लेनी चाहिए। ऐसी महिलाओं को हर घंटे कुछ ना कुछ खाते पीते रहना चाहिए। नींद अवश्य लेनी चाहिए जिससे मूड फ्रेश होगा और अच्छे हार्मोन्स क्रिएट होंगे। तो बेबी भी हैल्थी होगा। 

4- प्रेग्नेंसी के समय गैस्ट्रिक प्रॉब्लम्स बढ़ जाती हैं जैसे- डायरिया,एसिडिटी, कब्ज़ इत्यादि। ऐसे में ऑयली और स्पाइसी खाने से बचें। फ्रिज में रखा हुआ बासी खाना ना खाएं। क्योंकि इसमें कुछ बैक्टीरिया उत्तपन्न हो जाते हैं। जिससे फ़ूड पॉयजनिंग हो सकती है। हमेशा ताज़ा पका हुआ भोजन ही खाएं। प्रेग्नेंसी के दौरान डायरिया होना ख़तरनाक साबित हो सकता है। इसीलिए इससे बचें।
प्रेग्नेंट महिलाओं को आयरन की अत्यधिक आवश्यकता होती है। इस दौरान चाय का प्रयोग कम करें। क्योंकि चाय आयरन के absorption को कम कर देती है।

5- प्रेग्नेंसी में पहले टर्म में ही डॉक्टर की सलाह से मल्टी विटामिन, आयरन ,कैल्शियम, विटामिन B12 की टैबलेट्स लेनी शुरू कर देनी चाहिए। इससे हीमोग्लोबिन लेवल कंट्रोल रहता है। हीमोग्लोबिन लेवल को नियंत्रित रखना  आवश्यक होता है क्योंकि डिलीवरी के दौरान 1-2 gm ब्लड का लॉस हो जाता है।

6- इस दौरान ओरल हाइजीन की भी समस्या हो जाती है। क्योंकि पीएच लेवल कम होने लगता है और एसिड बनने लगता है। जिससे अल्सर की समस्या हो जाती है। ऐसे में अपने डेंटिस्ट से कंसल्ट करें।

7- प्रेग्नेंट महिलाओं को जी मिचलाना(nausea), उल्टी होना(vomiting) जैसी समस्याएं होने लगती है। नींबू और आंवले के प्रयोग से इससे राहत मिल सकती है।

8- बीपी(B.P), शुगर(Diabetes), एनीमिया(Anaemia) के पेशेंट को फ़ास्ट नहीं रखना चाहिए क्योंकि फ़ास्ट में कार्बोहाइड्रेट अर्थात् अनाज(Grains) का प्रयोग नहीं होता है। जिससे ब्लड शुगर लो हो सकता है। और लो ब्लड शुगर स्ट्रेस हार्मोन्स क्रिएट करता है जोकि प्रेग्नेंट महिलाओं के पर बुरा प्रभाव डालता है। बीपी लो होने का मुख्य कारण नमक की कमी और पानी की कमी होती है। इसे नियंत्रित रखें। बीपी मशीन घर पर ले आएं और समय समय पर बीपी चेक कर एक चार्ट बना लें। फिर अपने डॉक्टर से परामर्श लें। पूरे दिन में संतुलित आहार ना मिलने पर खून की कमी भी हो जाती है जिसे एनेमिया कहते हैं। तो ब्लड वॉल्यूम का संतुलन भी बनाए रखें।

9- यदि सिर दर्द,चक्कर आना, बीपी लो होना, वॉमिटिंग होना, वेट लॉस होना, पसीना ज़्यादा आना, पेट दर्द होना, कमर दर्द होना, बॉडी पॉस्चर चेंज होना, डिस्चार्ज होना आदि समस्या है तो अपने डॉक्टर को बताएं।

10- अगर पैरों में सूजन है तो ये एक गंभीर समस्या हो सकती है जैसे – हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट , किडनी प्रॉब्लम। ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

11- 7 महीनों से प्रेग्नेंट महिला को फ़ास्ट बिल्कुल नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे प्री टर्म लेबर पेन हो सकता है। और समय से पहले डिलीवरी का ख़तरा रहता है। जिससे प्री मैच्योर बेबी हो सकता है।

12- प्रेग्नेंट महिलाएं वॉटर फास्टिंग बिल्कुल ना करें। इससे वो डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकती हैं। फ़ास्ट रखने से पहले प्रेग्नेंट महिला अपने डॉक्टर से एक बार परामर्श अवश्य लें। रोज़ा या व्रत के स्थान पर वो दान दक्षिणा कर सकती हैं।

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