फिर सामने आई यूपी पुलिस की दबंगई, ढ़ाबे वाले ने पुलिस से खाना खाने के रुपए क्या मांगे, पुलिस ने दिखाया फर्जी मुठभेड़ और भेज दिया जेल

उत्तर प्रदेश की एटा पुलिस का एक अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है। एक ढाबे वाले ने पुलिस से खाना खाने के रुपए मांगे तो पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखा दी और जेल भेज दिया। पीड़ित विकलांग है जिसने अब एटा डीएम से न्याय की गुहार लगाई है, वही एटा डीएम विभा चहल ने पीड़ित को न्याय का आश्वाशन देते हुए एएसपी क्राइम राहुल कुमार को जाँच सौपकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की बात कही है।

खाने के रुपए मांगना पीड़ित को पड़ गया भारी

मामला कोतवाली देहात थाने का है। प्रवीण कुमार नाम के एक विकलांग व्यक्ति के द्वारा जिलाधिकारी विभा चहल को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया था जिसमें कहा गया था कि उसका ढाबा एटा से 5 किलोमीटर दूर आगरा रोड पर खुशाल गढ़ गांव के समीप बना हुआ है जहां पीड़ित अपने भाई और मां के साथ छोटा सा ढाबा चला कर दो वक्त की रोजी रोटी कमाता था, पीड़ित का काम शुरू हुए अभी चार पांच महीना ही बीते थे कि तभी पुलिस की ढाबे पर नजर लग गई, पुलिस के सिपाहियों शैलेन्द्र यादव और सन्तोष यादव ने होटल पर खाना खाकर रुपए मांगना पीड़ित को भारी पड़ गया।पहले तो दोनों सिपाहियों ने ढाबे वाले की जमकर पिटाई करते हुए गाली-गलौज की और कहा कि ढाबा नहीं चलने देंगे। अगले दिन दोपहर में 2 बजे के आसपास थानाध्यक्ष सहित भारी फोर्स के साथ होटल पर दबिश दे दी होटल के कर्मियों सहित होटल पर खाना खा रहे दो बिहार के व्यक्ति और कुछ अन्य ग्राहकों सहित पुलिस ने लगभग 11 लोगों को उठाकर थाने ले आई जिसमें से एक व्यक्ति को ₹100000 की रिश्वत लेकर छोड़ दिया और उन पर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर बंटू नाम के शराब माफिया से अवैध शराब मंगाकर सभी निर्दोषों पर पुलिस ने शराब एवं अन्य मादक पदार्थ की तस्करी दिखाते हुए 6 तमंचे और गांजा लगाकर जेल भेज दिया।

नौकरी छूटने के बाद शुरू किया था ढ़ाबा  

बता दें कि प्रवीण कुमार कभी टाटा केमिकल में इंजीनियर हुआ करता था। 3 साल पहले एक सड़क हादसे में उसने अपना पैर गवा दिया दूसरा पैर भी ठीक से काम नहीं करता है। इलाज में काफी रुपए खर्च होने के बाद घर की स्थिति काफी खराब हो गई थी जिसके बाद दिव्यांगजन प्रवीण ने अपने रिश्तेदार से जमीन किराए पर लेकर 5 माह पूर्व एक छोटा सा ढाबा शुरू किया जिस पर उसके माँ और भाई बैठकर अपनी रोजी-रोटी का गुजारा करते थे। 4 मार्च को संतोष और शैलेंद्र नाम के थाना कोतवाली देहात में तैनात सिपाही खाना खाने आए जब प्रवीण ने सिपाहियों के खाना खाने के बाद रुपए मांगे तो दोनों से सिपाही आग बबूला हो गए और उस को काफी भला-बुरा कहते हुए मारपीट शुरू कर दी पुलिस यहीं पर ही नहीं रुके, अगले दिन पुलिस ने प्लानिंग के तहत मैं थाना अध्यक्ष के होटल पर दबिश दे दी और 11 लोगों को होटल से उठाकर ले गई जिसमें से एक व्यक्ति को पुलिस द्वारा ₹100000 लेकर छोड़ने का आरोप लगाया वहीं 10 लोगों को डकैती की योजना बनाते और मादक पदार्थ एवं से तमंचा लगाकर जेल भेज दिया कहीं ना कहीं पुलिस के इस कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं कि पुलिस अगर रक्षक की जगह भक्षक बन जाएगी तो आम जनता किसके सहारे सुरक्षित रहेगी।

जिलाधिकारी विभा चहल तक पहुंचा मामला 

वहीं, इस पूरे मामले पर जांच कर रहे एडिशन एसपी क्राइम राहुल कुमार ने बताया के जिलाधिकारी के द्वारा एक प्रार्थना पत्र जांच के लिए मेरे पास आया है जिसमें पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध रही है पहले से गबन के मामले में थानाध्यक्ष इंद्रेश पाल पर मुकदमा दर्ज है और नया मामला यह मुझे जांच करने के लिए मिला है जिसमें पुलिस कर्मियों द्वारा गलत तरीके से लोगों को फंसाने का मामला संज्ञान में आया है अगर प्रकरण में पुलिस के द्वारा फर्जी तरीके से लोगों को जेल भेजने का मामला जांच में सही पाया गया तो किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

एटा से आर.बी. द्विवेदी की रिपोर्ट, नेक्स्ट इंडिया टाइम्स

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