पहली कक्षा की NCERT की किताब में आम बेचती एक ‘छोकरी’ पर सोशल मीडिया में मचा हंगामा

एनसीईआरटी की कक्षा-1 के सिलेबस में पढ़ाई जाने वाली एक कविता इन दिनों चर्चा का विषय बन गई है और यह कविता सोशल मीडिया पर लगातार आलोचनाओं का शिकार झेल रही है। कविता का शीर्षक है ‘आम की टोकरी। इस कविता को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बवाल हो रहा है। हिंदी भाषा के कई जानकार और सोशल मीडिया यूजर्स इस कविता को पाठ्यपुस्तक से हटाने की मांग कर रहे थे। यह कविता रामकृष्ण शर्मा खद्दर ने लिखी है। कविता पहली कक्षा के बच्चे 2006 से लगातार पढ़ रहे हैं। साल 2018 से उत्तराखण्ड के बच्चे भी अब इस कविता को पढ़ रहे हैं

यह कविता राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् द्वारा तैयार की गई किताब रिमझिम 1 का हिस्सा है। बताया जा रहा है इस कविता में ‘बाल श्रम’ को बढ़ावा दिया जा रहा है और कविता में प्रयोग किए गए शब्द छोकरी, चूसना और दाम शब्द आपत्तिजनक है। छोकरी शब्द को कई लोग आवारा बोल चाल की भाषा बता रहे थे और यह भी तर्क दे रहे थे कि पहली कक्षा के छात्र अगर इस शब्द को पढ़ेंगे तो उनके मस्तिष्क पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यह भी कहा जा रहा था कि इस कविता में छह साल की बच्ची से आम बिकवा कर बाल मजदूरी को प्रदर्शित किया जा रहा है। 

अवनीश शरण 2009 बैच के छत्तीसगढ़ काडर के आईएएस अधिकारी हैं और राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग में काम करते हैं। पाठ्यपुस्तक से कविता का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उन्होंने इस साहित्य को घटिया क्वालिटी का बताया है और कवि की साख पर सवाल उठाए हैं। बॉलीवुड अभिनेता अशुतोष राणा ने भी 1इस विषय पर एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा है और कहा है कि एक तरफ़ हम हिंदी भाषा के गिरते स्तर और इसकी हो रही उपेक्षा पर हाय-तौबा मचाते हैं और दूसरी ओर इतने निम्न स्तर की रचना को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना देते हैं?

ऐसी रचना को निश्चित ही पाठ्यक्रम में नहीं रखा जाना चाहिए क्योंकि जैसे सिंह की पहचान उसकी दहाड़ होती है हाथी की पहचान उसकी चिंघाड़ होती है वैसे ही मनुष्य की पहचान उसकी भाषा होती है। इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर भी लगातार इस विषय पर अपनी टिप्पणी दे रहे हैं.। इस संबंध एनसीईआरटी का पक्ष भी जानना बेहद महत्वपूर्ण हो जा जाता है। एनसीईआरटी 1का कहना है कि ये कविता स्थानीय भाषाओं की शब्दावली को बच्चों तक पहुंचाने के उद्देश्य से शामिल की गई है। ‘एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में दी गई कविताओं के संदर्भ में एन.सी.एफ-2005 के परिप्रेक्ष्य में स्थानीय भाषाओं की शब्दावली को बच्चों तक पहुंचाने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ये कविताएं शामिल की गई हैं ताकि सीखना रुचिपूर्ण हो सके। वहीं, आगे एनसीईआरटी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। इसी पाठ्यचर्या की रूपरेखा के आधार पर भविष्य में पाठ्यपुस्तकों का निर्माण किया जाएगा। एनसीईआरटी ने इस कविता को लेकर सफाई ट्विटर के जरिए दी है।

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