पड़ताल: कोरोना फंडिंग के तहत मोदी सरकार की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक सहायता का सच?

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस मैसेज में बताया है जा रहा है कि सरकार ने कोरोना महामारी की वजह से उत्पन्न हुई समस्याओं से निजात दिलाने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। अब इस मैसेज को लोग एक-दूसरे को शेयर करने में लगे हुए हैं। दरअसल कोरोना वायरस की वजह से फैली महामारी के बाद कई लोगों की वित्तीय हालत बेहद खस्ता हो गई है। देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के बाद लोगों के रोजगार पर संकट के बादल छा गए हैं। लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए समस्याओं का सामना कर रहे हैं। लोगों की इन्हीं समस्याओं के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रही आर्थिक पैकेज की खबरों ने ध्यान खींचा है।  

वायरल हो रहे मैसेज में क्या कहा गया है?

आर्थिक पैकेज संबंधित जो मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उसमें कहा जा रहा है कि सरकार की तरफ से 18 साल से अधिक उम्र के सभी नागरिकों को कोरोना फंडिंग के तहत तहत 1,30,000 रुपये दिए जाएंगे।

वायरल हो रहे मैसेज की सच्चाई?

नेक्स्ट इंडिया टाइम्स की हमारी टीम ने जब आर्थिक पैकेज संबंधित वायरल हो रहे मैसेज की पड़ताल की तो पता चला कि ऐसा कोई भी आदेश सरकार की तरफ से जारी नहीं किया गया है। केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक (PIB Fact Check) की तरफ से खुद ऐसी खबरों को फर्जी बताया है।

हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने फर्जी मैसेज पर क्या कहा?  

पीआईबी ने जो ट्वीट किया है उसमें कहा है कि “’सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में जानकारी दी जा रही है कि केंद्र सरकार देश की हर बेटी के बैंक अकाउंट में प्रति महीने 2,500 रुपये डालेगी। लेकिन, ऐसा कुछ नहीं है। ये जानकारी पूरी तरह से गलत है और ऐसे मैजेस से जालसाज लोगों को अपने झांसे में फंसा रहे हैं। मोदी सरकार की ओर से ऐसी कोई योजना नहीं चलाई जा रही है। एक यूट्यूब वीडियो में यह दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ‘कन्या सम्मान योजना’ के तहत देश की बेटियों के बैंक खाते में हर महीने 2,500 रुपये डाल रही है”।

कोरोना काल में वायरल हो रही हैं फर्जी खबरें

बताते चलें कि कोरोना काल में इससे पहले भी कई ऐसे मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं जिनमें ऐसी जानकारी साझा की जा चुकी है। चूंकि इन विपरीत परिस्थितियों में लोग संकट में हैं इसलिए मदद संबंधित ऐसे मैजेज लोग तुरंत एक-दूसरे को साझा करने लगते हैं। ऐसी ही स्थिति में ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले लोग ग्राहकों से बैंक संबंधित जानकारी लेने के बाद लोगों के बैंक अकाउंट पर धावा बोल रहे हैं।  

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