‘नेत्रदान पखवाड़ा’ जारी, आप भी नेत्रदान करके दो लोगों के जीवन को रोशन कर सकते हैं

यह दुनियां बेहद ही खूबसूरत है। हमारे आसपास की हर वस्तु में एक अलग ही सुंदरता छिपी होती है जिसे देखने के लिए आंखों की जरुरत होती है। लेकिन जरा सोचिए कि बिना आंखों के यह दुनियां कैसी लगेगी? चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा दिखेगा। आंखें ना होने का दुख वही समझ सकता है जिसके पास आंखें नहीं होतीं।

आंखों की महत्वता तो हम सब जानते हैं और इसीलिए इसकी सुरक्षा भी हम बड़ी गंभीरता से करते हैं लेकिन हममें से बहुत कम होते हैं जो अपने साथ दूसरों के बारे में भी सोचते हैं। आंखें ना सिर्फ हमें रोशनी दे सकती हैं बल्कि हमारे मरने के बाद नेत्रदान से किसी और की जिंदगी से भी अंधेरा हटा सकती हैं। इसीलिए देशभर में नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूप करने के लिए राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। यह पखवाड़ा हर वर्ष 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक मनाया जाता है। इस अभियान का उद्देश्य नेत्रदान के महत्व के बारे में व्यापक पैमाने पर जन जागरूकता पैदा करना है तथा लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना है।

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में यूपी कम्युनिटी का आई बैंक है जहां पर नेत्रदान पखवाड़ा आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम से लोगों को नेत्रदान को लेकर जागरूक किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण की वजह से इस वर्ष लोगों को जागरूक करने के लिए नई तरकीबें अपनाई गई हैं और मीडिया, सोशल मीडिया और लोगों से दूरी बनाकर लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा रही है।

देश में करीब ढ़ाई लाख लोग कर्निया की समस्या से पीड़ित

यूपी कम्युनिटी आई-बैंक के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि “हमारे नेत्र का काला गोल हिस्सा ‘कार्निया’ कहलाता है। यह आँख का पर्दा है जो बाहरी वस्तुओं का चित्र बनाकर हमें दृष्टि देता है। यदि कर्निया पर चोट लग जाये, इस पर झिल्ली पड़ जाये या इसपर धब्बे पड़ जायें तो दिखाई देना बन्द हो जाता है। इन लोगों के जीवन का आंधेरा दूर हो सकता है यदि उन्हें किसी मृत व्यक्ति का कर्निया प्राप्त हो जाये”। डॉ. अरुण शर्मा की मानें तो देश में लगभग 22 लाख ऐसे लोग हैं, जिन्हें आंखों में नई पुतलियों की जरूरत है। उत्तर प्रदेश तकरीबन दो लाख ऐसे लोग है जिनकी आंखों को पुतली चाहिए। उन्होंने जानकीती दी कि भारत सरकार के अनुसार हर वर्ष 1 लाख आई-ट्रांसप्लांट होने चाहिए, लेकिन असलियत में यह नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2019 की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में सिर्फ 30 हजार आई ट्रांसप्लांट ही हुए हैं।

नेत्रदान को लेकर समाज में है कई भ्रांतियां

डॉ. अरुण शर्मा बताते हैं कि “जब बात नेत्रदान की होती है तो काफी लोग इस अंधविश्वास में पीछे हट जाते हैं कि कहीं अगले जन्म में वह नेत्रहीन ना पैदा हो जाएं. इस अंधविश्वास की वजह से दुनियां के कई नेत्रहीन लोगों को जिंदगी भर अंधेरे में ही रहना पड़ता है जबकि सच्चाई यह है कि जब भी किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो 6 घंटे के अंदर उस व्यक्ति की आंखों की सिर्फ पुतलियों को ही निकालकर सहेजा जाता है और अगले 14 दिनों के भीतर किसी जरूरतमंद में यह पुतलियां लगाकर उन्हें आंखों की रोशनी दी जा सकती है”।

नेत्रदान है वरदान
यूपी कम्युनिटी आई बैंक के डायरेक्टर डॉ. अरुण ने बताया कि आई-बैंक में किसी भी मृत व्यक्ति के आई डोनेशन के लिए 6390 826 826 पर फोन किया जा सकता है। इस कॉल के बाद आई बैंक की एक टीम मृत व्यक्ति के परिजनों तक पहुंचती है और 6 घंटे के भीतर आंखों की पुतलियों को निकालकर सहेजा जा सकता है। इससे दो नए व्यक्तियों को दुनिया देखने का मौका मिल सकता है। नेत्रदान की ज्यादा जानकारी पाने के लिए आप यूपी कम्युनिटी आई-बैंक के डायरेक्टर डॉ. अरुण शर्मा की नेक्स्ट इंडिया से खास बातचीत देख सकते हैं। नीचे दिए गए हमारे चैनल को क्लिक करें…

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