धनिया की खेती एवं उसके फायदे

प्राचीन काल से ही पूरे दुनिया में भारत देश को ‘‘मसालों की धरती‘‘ अथवा मसालों का बगीचा आदि नामों से जाना जाता है। धनिया के बीज एवं पत्तियां भोजन को अति खुशबूदार एवं स्वादिष्ट बनाने के काम आते है। मानो जैसे भोजन में चार चांद लग गया हो। भारत धनिया का प्रमुख एक्स्पोर्टर देश है। इसकी खेती पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, बिहार, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कनार्टक तथा उत्तरप्रदेश में अधिक की जाती है। मारवाड़ी भाषा में इसे “धोणा” कहा जाता है।
धनिया में एक विशेष गुण पाया जाता है जिसे हम लीनालूल पिग्मेंट के नाम से जानते हैं जो हमारे स्वास्थ्य में बहुत ही उपयोगी हैं जैसे सूजनमिर्गीदर्द से राहतआरामदायक नींद में आदि में लाभकारी होता है।



जलवायु
दोमट मिट्टीऔर बारिश पर आधारित खेती के लिए अच्छी जल निकास सुविधा होनी चाहिए और पीएच 6-7 के बीच होना चाहिए। 20-25℃ तापमान धनिया खेती के लिए अच्छा होता है।

प्रजातियां

RCR 41, RCR20, गुजरात धनिया 2 (जी-2), पूसा चयन 360, स्वाति लाम चयन CS20, साधना,राजेन्द्र स्वाति, CS287, CO1, CO2, CO3, RCR 684, RCR 436 हिसार सुगंध, कुंभराज, RCR 435, RCR 446, पंत हरितमा, सिम्पो एस 33, जे डी-1, ACR 1, CS 6, JD-1, RCR 480, RCR 728


गहरा

धनिये की फसल प्रजातियों के अनुसार लगभग 120-140 दिन में पककर तैयार हो जाती हैं। फसल पकने की अवस्था में दानों का रंग हल्का पीलापन लेने लगता हैं। पीलापन शुरू होते ही कटाई शुरू करें तथा खेत में ढेरियों को उल्टा रखें अर्थात बीज निचे की और तथा जड़ें ऊपर की और ताकि धुप में दानों का रंग खराब न हो। संभव हो सके तो छायादार स्थान पर सुखाएं जब दानों में नमी 10% तक हो तब भंडारण करें अन्यथा बोरो में भरते समय अधिक नमी की वजह से दानें खराब हो सकते हैं।


उपज

धनिया के बीज की औसत उत्पादन क्षमता 6-10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। हरी पत्तियों की दृष्टि से इसकी उत्पादन क्षमता 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है।

स्टोरेज

भण्डारण के समय धनिया बीज में 9-10 प्रतिशत नमी रहना चाहिए। धनिया बीज का भण्डारण पतले जूट के बोरों में करना चाहिए। बोरों को जमीन पर तथा दिवार से सटे हुए नही रखना चाहिए। जमीन पर लकड़ी के गट्टों पर बोरों को रखना चाहिए। बीज के 4-5 बोरों से ज्यादा एक के ऊपर नही रखना चाहिए। बीज के बोरों को ऊंचाई से नही फटकना चाहिए। बीज के बोरें न सीधे जमीन पर रखें और न ही दीवार पर सटाकर रखें। बोरियों मे भरकर रखा जा सकता है।

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